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जानिए क्‍या है पीएनबी घोटाला, कैसे हुई 11500 करोड़ की हेरा-फेरी

IndiaTV Paisa Photo Desk [Updated: 17 Feb 2018, 12:47 PM IST]
  • भारत में बड़े घोटाले कोई नई बात नहीं है। लेकिन देश की अर्थव्‍यवस्‍था की रीढ़ माने जा रहे बैंकिंग सिस्‍टम में अब तक का सबसे बड़ा घोटाला सामने आया है। इसे घोटाला कहें, हेरा फेरी कहें या फिर कुछ और, लेकिन सच यही है कि पीएनबी को 11500 करोड़ या फिर इससे भी ज्‍यादा का चूना लगा है। इस चपेट में इलाहाबाद बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और एक्सिस बैंक जैसे दूसरे बैंक भी आए हैं।
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    भारत में बड़े घोटाले कोई नई बात नहीं है। लेकिन देश की अर्थव्‍यवस्‍था की रीढ़ माने जा रहे बैंकिंग सिस्‍टम में अब तक का सबसे बड़ा घोटाला सामने आया है। इसे घोटाला कहें, हेरा फेरी कहें या फिर कुछ और, लेकिन सच यही है कि पीएनबी को 11500 करोड़ या फिर इससे भी ज्‍यादा का चूना लगा है। इस चपेट में इलाहाबाद बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और एक्सिस बैंक जैसे दूसरे बैंक भी आए हैं।

  • ऐसे में यह मामला और भी बड़ा हो सकता है। अब सभी के सामने सवाल यही है कि इतना बड़ा घोटाला या फर्जीवाड़ा हुआ कैसे। आइए इंडिया टीवी पैसा की टीम आपको बताती है कि यह पीएनबी घोटाला क्‍या है और कैसे शातिर दिमागों की टोली ने इसे अंजाम दिया।
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    ऐसे में यह मामला और भी बड़ा हो सकता है। अब सभी के सामने सवाल यही है कि इतना बड़ा घोटाला या फर्जीवाड़ा हुआ कैसे। आइए इंडिया टीवी पैसा की टीम आपको बताती है कि यह पीएनबी घोटाला क्‍या है और कैसे शातिर दिमागों की टोली ने इसे अंजाम दिया।

  • क्‍या है पीएनबी घोटाला : भारतीय बैंकिंग इतिहास के सबसे बड़े घोटाले की जड़ लैटर ऑफ अंडरटेकिंग यानि कि एलओयू की व्‍यवस्‍था है। भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था में यह सिस्‍टम सदियों पुराना है। पहले व्‍यापारी इसे हुंडी के रूप में प्रयोग करते थे, आज यह एलओयू का रूप लेकर मौजूद है। यह एक तरह की गारंटी होती है जिसके आधार पर उसी बैंक की दूसरी शाखाएं या फिर दूसरे बैंक खातेदार को पैसा मुहैया करा देते हैं। बैंक खाताधारक की मार्जिन मनी के आधार पर यह एलओयू जारी करता है। अब यदि खातेदार डिफॉल्ट कर जाता है तो एलओयू मुहैया कराने वाले बैंक की यह जिम्मेदारी होती है कि वह संबंधित बैंक को बकाए का भुगतान करे। बैंक इसी मार्जिन मनी से दूसरे बैंक को भुगतान करता है।
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    क्‍या है पीएनबी घोटाला : भारतीय बैंकिंग इतिहास के सबसे बड़े घोटाले की जड़ लैटर ऑफ अंडरटेकिंग यानि कि एलओयू की व्‍यवस्‍था है। भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था में यह सिस्‍टम सदियों पुराना है। पहले व्‍यापारी इसे हुंडी के रूप में प्रयोग करते थे, आज यह एलओयू का रूप लेकर मौजूद है। यह एक तरह की गारंटी होती है जिसके आधार पर उसी बैंक की दूसरी शाखाएं या फिर दूसरे बैंक खातेदार को पैसा मुहैया करा देते हैं। बैंक खाताधारक की मार्जिन मनी के आधार पर यह एलओयू जारी करता है। अब यदि खातेदार डिफॉल्ट कर जाता है तो एलओयू मुहैया कराने वाले बैंक की यह जिम्मेदारी होती है कि वह संबंधित बैंक को बकाए का भुगतान करे। बैंक इसी मार्जिन मनी से दूसरे बैंक को भुगतान करता है।

  • कैसे हुआ करोड़ों रुपए का यह खेल: जैसे कि बताया गया है कि मार्जिन मनी के आधार पर बैंक एलओयू जारी करता है। लेकिन इस मामले में बिना मार्जिन मनी के पूरा खेल हुआ। पीएनबी के एक डेप्युटी मैनेजर गोकुलनाथ शेट्टी ने कथित तौर पर स्विफ्ट मेसेजिंग सिस्टम का दुरुपयोग किया और कथित रूप से नीरव मोदी की कंपनियों को बिना मार्जिन मीन के एलओयू दिया। बैंक इसी स्विफ्ट मैसेजिंग सिस्टम से विदेशी लेनदेन के लिए एलओयू के जरिए दी गई गारंटीज को ऑथेंटिकेट करते हैं। इन्हें ऑथेंटिकेशनों के आधार पर कुछ भारतीय बैंकों की विदेशी शाखाओं ने फॉरेक्स क्रेडिट दी थी।
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    कैसे हुआ करोड़ों रुपए का यह खेल: जैसे कि बताया गया है कि मार्जिन मनी के आधार पर बैंक एलओयू जारी करता है। लेकिन इस मामले में बिना मार्जिन मनी के पूरा खेल हुआ। पीएनबी के एक डेप्युटी मैनेजर गोकुलनाथ शेट्टी ने कथित तौर पर स्विफ्ट मेसेजिंग सिस्टम का दुरुपयोग किया और कथित रूप से नीरव मोदी की कंपनियों को बिना मार्जिन मीन के एलओयू दिया। बैंक इसी स्विफ्ट मैसेजिंग सिस्टम से विदेशी लेनदेन के लिए एलओयू के जरिए दी गई गारंटीज को ऑथेंटिकेट करते हैं। इन्हें ऑथेंटिकेशनों के आधार पर कुछ भारतीय बैंकों की विदेशी शाखाओं ने फॉरेक्स क्रेडिट दी थी।

  • कब सामने आया ये फर्जीवाड़ा : यह घोटाला कुछ अधिकारियों की मिली भगत से स्विफ्ट मेसेजिंग का दुरुपयोग करने से हुआ था। इस साल जनवरी महीने में पहले के एलओयू की अवधि खत्म हो गई और भारतीय बैंकों की विदेशी शाखओं को कर्ज की रकम वापस नहीं मिली तो इस मामले पर से पर्दा उठा। तब उन्होंने पीएनबी से संपर्क किया जिसने बताया कि उन्हें फर्जीवाड़े से गारंटी दी गई थी।
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    कब सामने आया ये फर्जीवाड़ा : यह घोटाला कुछ अधिकारियों की मिली भगत से स्विफ्ट मेसेजिंग का दुरुपयोग करने से हुआ था। इस साल जनवरी महीने में पहले के एलओयू की अवधि खत्म हो गई और भारतीय बैंकों की विदेशी शाखओं को कर्ज की रकम वापस नहीं मिली तो इस मामले पर से पर्दा उठा। तब उन्होंने पीएनबी से संपर्क किया जिसने बताया कि उन्हें फर्जीवाड़े से गारंटी दी गई थी।

  • कौन-कौन है इस मामले में संदिग्‍ध : अभी तक प्राप्‍त जानकारी के अनुसार यह घोटाला कथित रूप से देश के नामी गिरामी ज्‍वैलर नीरव मोदी ने अंजाम दिया है। इस घोटाले में कई बड़ी आभूषण कंपनियां मसलन गीतांजलि, गिन्नी और नक्षत्र भी विभिन्न जांच एजेंसियों की जांच के दायरे में आ गई हैं। चार बड़ी आभूषण कंपनियां गीतांजलि, गिन्नी, नक्षत्र और नीरव मोदी जांच के घेरे में हैं। सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय उनकी विभिन्न बैंकों से सांठगांठ और धन के अंतिम इस्तेमाल की जांच कर रहे हैं। आपको बता दें कि बैंक मैनेजर गोकुलनाथ शेट्टी को गिरफ्तार कर लिया गया है।
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    कौन-कौन है इस मामले में संदिग्‍ध : अभी तक प्राप्‍त जानकारी के अनुसार यह घोटाला कथित रूप से देश के नामी गिरामी ज्‍वैलर नीरव मोदी ने अंजाम दिया है। इस घोटाले में कई बड़ी आभूषण कंपनियां मसलन गीतांजलि, गिन्नी और नक्षत्र भी विभिन्न जांच एजेंसियों की जांच के दायरे में आ गई हैं। चार बड़ी आभूषण कंपनियां गीतांजलि, गिन्नी, नक्षत्र और नीरव मोदी जांच के घेरे में हैं। सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय उनकी विभिन्न बैंकों से सांठगांठ और धन के अंतिम इस्तेमाल की जांच कर रहे हैं। आपको बता दें कि बैंक मैनेजर गोकुलनाथ शेट्टी को गिरफ्तार कर लिया गया है।

  • कितनी हुई वसूली : आपको बता दें कि पीएनबी घोटाले के खुलासे के एक दिन के भीतर ही ईडी 11,400 करोड़ रुपए के घोटाले की आधी रकम जब्त करने में सफल रहा है। गुरुवार देर शाम तक आरोपियों की 5100 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की जा चुकी थी। ईडी की कोशिश आरोपियों की अधिक से अधिक संपत्ति जब्त कर घोटाले की रकम बरामद करने की है।
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    कितनी हुई वसूली : आपको बता दें कि पीएनबी घोटाले के खुलासे के एक दिन के भीतर ही ईडी 11,400 करोड़ रुपए के घोटाले की आधी रकम जब्त करने में सफल रहा है। गुरुवार देर शाम तक आरोपियों की 5100 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की जा चुकी थी। ईडी की कोशिश आरोपियों की अधिक से अधिक संपत्ति जब्त कर घोटाले की रकम बरामद करने की है।

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