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भूषण स्‍टील के अधिग्रहण में सफल बोलीदाता के रूप में चुनी गई टाटा स्टील, नियामकीय मंजूरियों के साथ 45500 करोड़ रुपए में होगा सौदा

टाटा स्‍टील लिमिटेड ने आज कहा है कि उसने कर्ज के बोझ से दबी भूषण स्‍टील लिमिटेड (बीएसएल) को खरीदने के लिए लगाई गई बोली में जीत हासिल की है।

Edited by: Abhishek Shrivastava [Updated:23 Mar 2018, 9:28 PM IST]
tata- IndiaTV Paisa
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नई दिल्‍ली। टाटा स्‍टील लिमिटेड ने आज कहा है कि उसे कर्ज के बोझ से दबी भूषण स्‍टील लिमिटेड (बीएसएल) को खरीदने के लिए सफल बोलीदाता के रूप में चुना गया है।  कंपनी ने एक बयान में कहा है कि भूषण स्‍टील लिमिटेड के कर्जदाताओं की एक सम‍िति ने 22 मार्च 2018 को टाटा स्‍टील को सफल समाधान आवेदक के रूप में घोषित किया है। यह अधिग्रहण अब एनसीएलटी और भारतीय प्रतिस्‍पर्धा आयोग समेत अन्‍य नियामकीय विभागों की मंजूरी पर निर्भर करेगा।

टाटा स्‍टील ने कहा कि उसने दिवालिया एवं ऋणशोधन संहिता, 2016 (आईबीसी) की कंपनी ऋणशोधन समाधान प्रक्रिया के तहत भूषण स्‍टील लिमिटेड के लिए आशय पऋ (एलओई) स्‍वीकार कर लिया है। 

टाटा स्‍टील ने भूषण स्‍टील को खरीदने के लिए 45,400 करोड़ रुपए की सबसे ऊंची बोली लगाई थी। यह बोली जेएसडब्‍ल्‍यू लिविंग द्वारा लगाई गई 28,000 करोड़ रुपए की बोली से बहुत अधिक थी। दिवाला एवं ऋण शोधन संहिता (आईबीसी), 2016 के तहत निपटने वाला यह पहला मामला बन जाएगा।

टाटा स्टील ने एक बयान में बताया कि भूषण स्टील के समाधान पेशेवर से यह सूचना मिली है कि दिवाला एवं ऋण शोधन संहिता के तहत कंपनी ऋण शोधन समाधान प्रक्रिया के अंतर्गत भूषण स्टील में नियंत्रणकारी हिस्सेदारी हासिल करने को लेकर सर्वाधिक बोली लगाने के कारण विजेता कंपनी के रूप में उभरी है।

इस सौदे से टाटा स्‍टील का ओवरऑल कर्ज और बढ़ जाएगा। दिसंबर तिमाही के अनुसार टाटा स्‍टील पर कुल 88,000 करोड़ रुपए का सकल ऋण है जो अगले दो-तीन सालों में बढ़कर एक लाख करोड़ रुपए से अधिक जो जाएगा। 2008 में टाटा स्‍टील ने एंग्‍लो-डच कंपनी कोरस के लिए भी बोली लगाई थी। जेएसडब्‍ल्‍यू लिविंग जेएसडब्‍ल्‍यू और पीरामल एंटरप्राइजेज के बीच एक संयुक्‍त उद्यम है।

भूषण स्‍टील ऑटो-ग्रेड स्‍टील का निर्माण करती है और इसकी सालाना उत्‍पादन क्षमता 56 लाख टन है। चालू वित्‍त वर्ष की दिसंबर तिमाही में कंपनी को 1607 करोड़ रुपए का शुद्ध नुकसान हुआ है, जबकि पिछले वित्‍त वर्ष की समान तिमाही में कंपनी को 743 करोड़ रुपए का घाटा हुआ था।

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