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NPPA ने 42 दवाओं का दाम 15 फीसदी तक घटाया

सरकार ने टीबी, कैंसर, हृदय संबंधी बीमारी, अस्थमा तथा तनाव जैसी बीमारियों के इलाज में उपयोग होने वाली 42 अनिवार्य दवाओं के दाम अब 15 फीसदी कम कर दिए है।

Dharmender Chaudhary [Updated:27 Jun 2016, 9:29 PM IST]
Good News: टीबी-कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का इलाज हुआ सस्ता, सरकार ने 42 दवाओं के दाम 15 फीसदी तक घटाए- IndiaTV Paisa
Good News: टीबी-कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का इलाज हुआ सस्ता, सरकार ने 42 दवाओं के दाम 15 फीसदी तक घटाए

नई दिल्ली। सरकार ने टीबी, कैंसर, हृदय संबंधी बीमारी, अस्थमा तथा तनाव जैसी बीमारियों के इलाज में उपयोग होने वाली 42 अनिवार्य दवाओं के दाम की अधिकतम सीमा तय कर दी जिससे इन दवाओं के मूल्य 15 फीसदी तक कम हो गए है। दवा मूल्य नियामक राष्ट्रीय औषधि मूल्य प्राधिकरण (NPPA) ने अपनी वेबसाइट पर जारी एक अधिसूचना में कहा कि औषधि मूल्य नियंत्रण संशोधन आदेश 2016 के तहत 45 अनुसूचित दवाओं के अधिकतम मूल्य को तय अथवा संशोधित संशोधित किया गया है। एक अधिकारिक सूत्र ने बताया, 45 दवाओं में से 42 दवाओं की कीमत में 15 प्रतिशत तक की कमी आई है।

एनपीपीए ने कहा कि मूल्य सीमा का पालन नहीं करने वाले विनिर्माताओं को औषधि (मूल्य नियंत्रण) आदेश, 2013 के तहत अधिक वसूली गई राशि को ब्याज सहित जमा कराना होगा। प्राधिकरण ने डीपीसीओ 2013 के तहत 12 दवाओं (फार्मूलेशन) के खुदरा मूल्य भी तय किए हैं। एक अन्य अधिसूचना में एनपीपीए ने कहा कि फोर फ्लूड्स के 32 अनुसूचित दवाओं के मूल्य को तय अथवा संशोधित किया है।

सरकार ने कैंसर जैसी 54 दवाओं के दाम की सीमा की तय

दवा मूल्य नियामक राष्ट्रीय फार्मास्युटिकल मूल्य प्राधिकरण (एनपीपीए) ने कैंसर, मधुमेह, गठिया, बैक्टिरिया संक्रमण तथा उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों के इलाज में काम आने वाली 54 दवाओं की कीमतों की सीमा तय कर दी है। इसके अलावा केंद्र ने 11 दवाओं के खुदरा मूल्य भी तय किए हैं। नियामक ने बयान में कहा, एनपीपीए ने दवा (मूल्य नियंत्रण) संशोधन आदेश, 2016 की अनुसूची एक के तहत 54 दवाओं के दाम निश्चित या संशोधित किए हैं। इसके अलावा डीपीसीओ, 2013 के तहत 11 दवाओं का खुदरा मूल्य भी निर्धारित किया गया है। पिछले महीने सरकार ने कुछ दवाओं के पैक के मूल्य निर्धारित किए थे। सरकार किसी एक इलाज खंड में सभी दवाओं के औसत के हिसाब से आवश्यक दवाओं का मूल्य तय करती है। इन दवाओं की बिक्री एक फीसदी से अधिक होनी चाहिए।

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