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देनदारी में चूक करने वाले नहीं दे सकते हैं मौलिक अधिकारों की दुहाई, यूनिटेक की याचिका खारिज: कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि देनदारी में चूक करने वाले को सरकार और प्राधिकारियों के खिलाफ अपने मूल अधिकारों को लागू कराने की मांग को छूट नहीं दी जा सकती।

Dharmender Chaudhary [Updated:01 May 2017, 8:48 PM IST]
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देनदारी में चूक करने वाले नहीं दे सकते हैं मौलिक अधिकारों की दुहाई, यूनिटेक की याचिका खारिज: कोर्ट

यूनिटेक ने मूल अधिकारों की रक्षा के लिए सुर्पीम कोर्ट में जाने के अधिकार अनुच्छेद 32 के तहत यह याचिका दायर की थी। याचिका में अदालत से अनुरोध किया गया था कि वह तेलंगाना राज्य औद्योगिक बुनियादी ढांचा निगम टीएसआईआईसी को इस कंपनी की 165 करोड़ रुपए से अधिक की राशि जारी करने का निर्देश दे।

न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, हम किसी डिफॉल्टर देनदारी में चूक करने वाले की सुनवाई नहीं कर सकते या उसपर संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत कोई अनुग्रह नहीं कर सकते। बेहतर होगा कि आम संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत राहत के लिए उच्च न्यायालय में जाएं।

कोर्ट ने 24 अप्रैल को आदेश दिया था कि कंपनी गुड़गांव में उसकी परियोजना में मकान खरीदने वाले 39 लोगों द्वारा जमा कराए गए 16.55 करोड़ रुपए की रकम पर 14 प्रतिशत की दर से ब्याज का पैसा 8 मई तक जमा कराए।

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