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Happy Lohri 2018: जानिए क्यों मनाई जाती है लोहड़ी का त्यौहार और क्या है इसका महत्व

लोहड़ी उत्तर भारत का एक प्रसिद्ध त्योहार है। यह मकर संक्रान्ति के एक दिन पहले मनाया जाता है। मकर संक्रान्ति की पूर्वसंध्या पर इस त्यौहार का उल्लास रहता है। रात्रि में खुले स्थान में परिवार और आस-पड़ोस के लोग मिलकर आग के किनारे घेरा बना कर बैठते हैं।

Edited by: India TV Lifestyle Desk [Updated:13 Jan 2018, 4:47 PM IST]
Happy Lohri 2018 Wishes: लोहड़ी क्यों...- Khabar IndiaTV
Happy Lohri 2018 Wishes: लोहड़ी क्यों मनाई जाती है लोहड़ी, क्या है इसका अर्थ और महत्व

नई दिल्ली : लोहड़ी उत्तर भारत का एक प्रसिद्ध त्योहार है। यह मकर संक्रान्ति के एक दिन पहले मनाया जाता है। मकर संक्रान्ति की पूर्वसंध्या पर इस त्यौहार का उल्लास रहता है। रात्रि में खुले स्थान में परिवार और आस-पड़ोस के लोग मिलकर आग के किनारे घेरा बना कर बैठते हैं। उत्तर भारत और खासकर पंजाब का सबसे प्रसिद्ध त्योहार है लोहड़ी। इस दिन सभी अपने घरों और चौराहों के बाहर लोहड़ी जलाते हैं। आग का घेरा बनाकर दुल्ला भट्टी की कहानी सुनाते हुए रेवड़ी, मूंगफली और लावा खाते हैं। लेकिन आपको मालूम है कि ये लोहड़ी क्यों जलाई जाती है इस दिन दुल्ला भट्टी की कहानी का क्या महत्व है।

कैसे मनाते हैं लोहड़ी ?

पारंपरिक तौर पर लोहड़ी फसल की बुआई और उसकी कटाई से जुड़ा एक विशेष त्यौहार है। इस दिन अलाव जलाकर उसके इर्दगिर्द डांस किया जाता है। लड़के भांगड़ा करते हैं। लड़कियां और महिलाएं गिद्द्दा करती है। इस दिन विवाहिता बेटियों को मां घर से कपड़े, मिठाई, रेवड़ी, फलादी भेजती है. वहीं जिन परिवारों में लड़के का विवाह होता है या जिन्हें पुत्र प्राप्ति होती है। उनसे पैसे लेकर मुहल्ले या गांव भर में बच्चे की रेवड़ी बांटते हैं।

कहां से आया लोहड़ी शब्द?
अनेक लोग मानते हैं कि लोहड़ी शब्द ‘लोई (संत कबीर की पत्नी) से उत्पन्न हुआ था, लेकिन कई लोग इसे तिलोड़ी से उत्पन्न हुआ मानते हैं, जो बाद में लोहड़ी हो गया। वहीं, कुछ लोग यह मानते है कि यह शब्द लोह’ से उत्पन्न हुआ था, जो चपाती बनाने के लिए प्रयुक्त एक उपकरण है।

Happy Lohri 2018 Wishes: लोहड़ी क्यों मनाई जाती है लोहड़ी, क्या है इसका अर्थ और महत्व

आग का क्या है महत्व?
लोहड़ी के दिन आग जलाने को लेकर माना जाता है कि यह आग्नि राजा दक्ष की पुत्री सती की याद में जलाई जाती है। पौराणिक कथा के अनुसार एक बार राजा दक्ष ने यज्ञ करवाया और इसमें अपने दामाद शिव और पुत्री सती को आमंत्रित नहीं किया। इस बात से निराश होकर सती अपने पिता के पास जवाब लेने गई कि उन्होंने शिव जी को यज्ञ में निमंत्रित क्यों नहीं भेजा। इस बात पर राजा दक्ष ने सती और भगवान शिव की बहुत निंदा की।

Happy Lohri 2018 Wishes: लोहड़ी क्यों मनाई जाती है लोहड़ी, क्या है इसका अर्थ और महत्व

सती बहुत रोई, उनसे अपने पति का अपमान नहीं देखा गया और उन्होंने उसी यज्ञ में खुद को भस्म कर दिया। सती के मृत्यु का समाचार सुन खुद भगवान शिव ने वीरभद्र को उत्पन्न कर उसके द्वारा यज्ञ का विध्वंस करा दिया। वहीं, कुछ लोगों का कहना है कि यह आग पूस की आखिरी रात और माघ की पहली सुबह की कड़क ठंड को कम करने के लिए जलाई जाती है।

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