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भारत में निमोनिया, डायरिया से सर्वाधिक बच्चों की मौत

नई दिल्ली: निमोनिया और डायरिया आज की तारीख में भले ही गंभीर बीमारियों की श्रेणी में न हों, लेकिन इन दोनों बीमारियों से दुनिया भर में बच्चों की सर्वाधिक मौतें भारत में होती है। शुक्रवार

IANS [Updated:22 Nov 2015, 4:18 PM IST]
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भारत में निमोनिया, डायरिया से सर्वाधिक बच्चों की मौत

नई दिल्ली: निमोनिया और डायरिया आज की तारीख में भले ही गंभीर बीमारियों की श्रेणी में न हों, लेकिन इन दोनों बीमारियों से दुनिया भर में बच्चों की सर्वाधिक मौतें भारत में होती है। शुक्रवार को जारी एक रिपोर्ट से यह जानकारी मिली। नाईजीरिया, पाकिस्तान, कांगो व अंगोला अन्य देश हैं, जहां निमोनिया व डायरिया से बेहद अधिक मौतें होती हैं।

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निमोनिया एंड डायरिया, 2015 रिपोर्ट के मुताबिक, "भारत द्वारा टीकाकरण अभियान में तेजी लाने के बावजूद निमोनिया तथा डायरिया से पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की सर्वाधिक मौतें हो रही हैं।"

रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2015 में भारत में पांच वर्ष से कम आयु के 297,114 बच्चों की मौत निमोनिया तथा डायरिया से हुई।

रिपोर्ट में कहा गया है, "इन दोनों बीमारियों से नाईजीरिया में 210,557, पाकिस्तान में 103,760, कांगो में 78,422 तथा अंगोला में 54,548 बच्चों की मौत हुई, जिनकी उम्र पांच वर्ष से कम थी। दोनों बीमारियों से पांच वर्ष से कम उम्र के सर्वाधिक बच्चों की मौत के मामले में 15 देशों की सूची में 22,394 मौतों के साथ तंजानिया सबसे निचले पायदान पर है।"

इस रिपोर्ट को जॉन्स हॉपकिंस ब्लूमबर्ग स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ में इंटरनेशनल वैक्सिन एक्सेस सेंटर (आईवीएसी) द्वारा जारी किया गया।

रिपोर्ट के मुताबिक, "साल 2015 में सहस्राब्दि विकास व बच्चों की मौत को कम करने के लक्ष्य की प्राप्ति की दिशा में वैश्विक प्रयास किए गए हैं, लेकिन फिर भी दुनियाभर में लगभग 59 लाख बच्चे पांचवां साल पूरा करने के पहले ही काल के गाल में समा जाएंगे।"

रिपोर्ट में कहा गया है, "इन 59 लाख बच्चों में से 16 फीसदी मौत के लिए निमोनिया, जबकि नौ फीसदी मौत के लिए डायरिया जिम्मेदार होगा।"

आईवीएसी के कार्यकारी निदेशक ओ ब्रायन ने कहा, "टीकों को लाना, उनका प्रचार-प्रसार करना तथा कम से कम छह महीनों तक शिशु को मां का दूध पिलाने से निमोनिया से लड़ने में सहायता मिल सकती है।"

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