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क्‍या है कोलेजियम सिस्‍टम ? जानिए सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में क्‍या दी है व्‍यवस्‍था ?

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने कोलेजियम व्यवस्था बहाल कर अधिकांश राजनीतिज्ञों व राजनीतिक दलों की मंशा पर पानी फेर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने संसद और 20 विधानसभाओं से एक सुर में पारित राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग

Edited by: India TV News Desk [Updated:12 Jan 2018, 2:09 PM IST]
क्या है कोलेजियम...- Khabar IndiaTV
क्या है कोलेजियम सिस्टम, जानने के लिए पढ़ें

नई दिल्ली क्या है कोलेजियम सिस्टम : सुप्रीम कोर्ट ने कोलेजियम व्यवस्था बहाल कर अधिकांश राजनीतिज्ञों व राजनीतिक दलों की मंशा पर पानी फेर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने संसद और 20 विधानसभाओं से एक सुर में पारित राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC) कानून को असंवैधानिक करार देकर रद्द कर दिया।

एनजेएसी से सुप्रीम कोर्ट को एतराज क्यों? संविधान के संशोधित अनुच्छेद 124ए (1) के ए और बी प्रावधानों में जजों की नियुक्ति की व्यवस्था करने वाले एनजेएसी में न्यायिक सदस्यों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने एनजेएसी में कानून मंत्री को शामिल करना संविधान में दिए गए न्यायपालिका की स्वतंत्रता और शक्तियों के बंटवारे के सिद्धांत के खिलाफ माना। कोर्ट ने एनजेएसी में दो प्रबुद्ध नागरिकों को शामिला किया जाना भी संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन माना है।  

सुप्रीम कोर्ट का ये है फैसला : 

- सुप्रीम कोर्ट ने यह मामला बड़ी पीठ को भेजने और कोलेजियम व्यवस्था के पूर्व फैसलों पर पुनर्विचार की सरकार की मांग रद्द कर दी।
- 99वें संविधान संशोधन कानून 2014 को अंसवैधानिक और शून्य घोषित किया।
- राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC) कानून-2014 को असंवैधानिक और शून्य घोषित किया।
- सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जजों की नियुक्ति और ट्रांसफर की कोलेजियम व्यव्सथा को बहाल कर दिया।

- वर्तमान कोलेजियम व्यवस्था में सुधार की संभावनाओं पर 3 नवंबर को सुनवाई

क्या है कोलेजियम व्यवस्था ?
कोलेजियम पांच लोगों का समूह है। इन पांच लोगों में भारत के मुख्य न्यायाधीश और सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ जज है। कोलेजियम द्वारा जजों के नियुक्ति का प्रावधान संविधान में कहीं नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के पांच वरिष्ठतम जजों की कमेटी (कोलेजियम) नियुक्ति व तबादले का फैसला करती है। कोलेजियम की सिफारिश मानना सरकार के लिए जरूरी होता है। यह व्यवस्था 1993 से लागू है।

कोलेजियम प्रणाली सुप्रीम कोर्ट की दो सुनवाई का नतीजा है। पहला 1993 का और दूसरा 1998 का है। कोलेजियम बनाने के पीछे न्यायपालिका की स्वतंत्रता को सुरक्षित रखने की मानसिकता सुप्रीम कोर्ट की रही। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने जजों की नियुक्ति के लिए संविधान में निहित प्रावधानों को दुबारा तय किया और जजों के द्वारा जजों की नियुक्ति का अधिकार दिया।कोलेजियम किसी व्यक्ति के गुण-कौशल के अपने मूल्यांकन के आधार पर नियुक्ति करता है और सरकार उस नियुक्ति को हरी झंडी दे देती है।

सवालों के घेरे में कोलेजियम व्यवस्था

सुप्रीम कोर्ट ने कोलेजियम व्यवस्था फिर बहाल कर दी है लेकिन यह अभी भी सवालों के घेरे में है। इसमें सुधार की जरूरत है। ये बात सुप्रीम कोर्ट भी जानता है और इसीलिए कोर्ट ने कोलेजियम व्यवस्था में सुधार पर विचार का मन बनाया है। इस बाबत उसने सरकार व अन्य पक्षों से सुझाव मांगे है। 3 नवंबर को मामले पर सुनवाई होगी।

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