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‘9/11 हमले पर हुए खर्च का कुछ हिस्सा भारत से दिया गया’

नई दिल्ली: अमेरिका में 9/11 हमलों में प्रयुक्त धन का कुछ हिस्सा भारत से दिया गया था। यह खुलासा पूर्व शीर्ष पुलिस अधिकारी नीरज कुमार ने किया है और उन्होंने अपने इस दावे का आधार

Bhasha [Updated:18 Nov 2015, 1:00 PM IST]
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‘9/11 हमले पर हुए खर्च का कुछ हिस्सा भारत से दिया गया’

नई दिल्ली: अमेरिका में 9/11 हमलों में प्रयुक्त धन का कुछ हिस्सा भारत से दिया गया था। यह खुलासा पूर्व शीर्ष पुलिस अधिकारी नीरज कुमार ने किया है और उन्होंने अपने इस दावे का आधार एक आतंकवादी द्वारा किए गए खुलासे को बताया है।

कुमार ने सीबीआई में काम किया था और वह दो साल पहले दिल्ली पुलिस आयुक्त के रूप में सेवानिवृत्त हुए थे। उन्होंने कहा कि इस धन की अपहरण के जरिये उगाही की गयी थी और आतंकवादी उमर शेख ने इसे 9/11 हमलावरों के प्रमुख मोहम्मद अट्टा को सौंपा था। शेख को भारत ने 1999 में इंडियन एयरलाइंस के अपहृत विमान के बदले में रिहा किया था।

आईपीएस के 1976 बैच के अधिकारी कुमार ने हरकत उल मुजाहिद्दीन के आतंकवादी आसिफ रजा खान से मिली जानकारी का हवाला देते हुए कहा कि शेख को धन आतंकवादी आफताब अंसारी ने दिया था। आफताब कोलकाता के अमेरिकन सेंटर पर हुए हमले के लिए जिम्मेदार था।

आसिफ रजा ने बताया कि उसके बॉस आफताब अंसारी ने खादिम शूज के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक पार्थ प्रतिम राय बर्मन के अपहरण में वसूल की गयी फिरौती की रकम को उमर शेख से साझा किया था। अंसारी अमेरिकन सेंटर हमले के लिए पश्चिम बंगाल की जेल में फांसी की सजा का इंतजार कर रहा है।

कुमार ने 1993 के बंबई बम विस्फोटों के बाद अपराध जगत की गतिविधियों के बारे में लिखी पुस्तक में कहा कि बर्मन अपहरण की फिरौती का कुछ हिस्सा..करीब एक लाख डॉलर (उस समय करीब 49 लाख रुपये) बाद में उमर शेख के जरिये मोहम्मद अट्टा तक पहुंचा दिया गया।

फिलहाल बीसीसीआई की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा की अगुवाई कर रहे कुमार ने कहा कि आसिफ रजा खान के मोहम्मद अट्टा तक धन पहुंचाने के खुलासे का उल्लेख एफबीआई की आतंकवाद निरोधक शाखा के उप सहायक निदेशक जान एस पिस्टोल ने वाशिंगटन में जुलाई 2003 में सीनेट की आतंकवादियों के वित्तपोषण संबंधी समिति के समक्ष किया था। इस पुस्तक में कुमार ने पीछा करने, योजना बनाने, नौकरशाही के बीच खींचतान तथा अंतत: भारत के सर्वाधिक वांछित आतंकवादी दाउद इब्राहिम से उनकी टेलीफोन पर हुई बातचीत के विवरण दिये हैं।

कुमार ने इस पुस्तक में एक फोन काल का उल्लेख किया है जो उनके करियर के अंतिम दिनों में आया जब वह टी20 टूर्नामेंट में कथित स्पाट फिक्सिंग में कुछ क्रिकेटरों की गिरफ्तारी संबंधी अभियान की अगुवाई कर रहे थे।

कुमार ने इस घटना को याद करते और मुस्कुराते हुए कहा, ‘‘मुझे लगता है कि वह दाऊद या उसका भाई अनीस था जिसने मुझसे कहा कि मुझे पीछा करना बंद कर देना चाहिए क्योंकि मैं सेवानिवृत्त होने वाला हूं।’’ उन्होंने याद करते हुए कहा कि दाउद इब्राहिम से उनकी पहली बातचीत विचित्र ढंग से हुई थी।

इस पुलिस अधिकारी ने दाउद से कहा था, ‘‘हां, बताइये आप मुझे कुछ बताना चाहते हैं जैसा मनीष :मध्यस्थ: ने मुझे कहा है।’’ दाउद बिल्कुल मुंबइया लहजे में विश्वास के साथ बोल रहा था तथा ‘‘उसने मुझे खुश करने की कोई कोशिश नहीं की।’’ उसने सामान्य ढंग से कहा, ‘‘साहब इसके पहले मैं कुछ बताउं, पहले आप बताइये कि आपको क्या लगता है कि मैने मुंबई में विस्फोट करवाये हैं।’’ कुमार ने याद करते हुए कहा, ‘‘मैंने उससे प्रतिवाद करते हुए कहा कि तुम किसी सवाल के जवाब में सवाल नहीं कर सकते।’’

कुमार सीबीआई में नव गठित विशेष कार्य बल में उपमहानिरीक्षक के रूप में तैनात थे और बंबई विस्फोटों की जांच देख रहे थे। उन्होंने कहा कि उन्होंने दाऊद से अपने बातचीत के बारे में मैंने अपने वरिष्ठों को अंधेरे में रखा।

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