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भारत, अमेरिका अपने संबंधों को नई उंचाइयों पर पहुंचाना जारी रखेंगे : वर्मा

ह्यूस्टन:  अमेरिका के एक शीर्ष राजनयिक ने कहा कि उनके देश और भारत ने रक्षा, आतंकवाद का मुकाबला, वैश्विक स्वास्थ्य, साइबर सुरक्षा और गहन अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में अपने संबंधों को मजबूत किया है

Bhasha
Bhasha 21 Sep 2015, 12:00:36 IST

ह्यूस्टन:  अमेरिका के एक शीर्ष राजनयिक ने कहा कि उनके देश और भारत ने रक्षा, आतंकवाद का मुकाबला, वैश्विक स्वास्थ्य, साइबर सुरक्षा और गहन अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में अपने संबंधों को मजबूत किया है और आने वाले महीनों में दोनों देश द्विपक्षीय सहयोग को नयी उंचाइयों तक पहुंचाने के लिए काम जारी रखेंगे। भारत में अमेरिका के राजदूत रिचर्ड वर्मा ने कहा हमारे रणनीतिक सहयोग में, हमने अपने सैन्य संबंधों को गहरा किया है। अब हम संयुक्त अभियानों की ओर हैं, हमने रक्षा सामग्री का संयुक्त उत्पादन किया है और हमने दोनों देशों की आबादी को सुरक्षित रखने में मदद के लिए करीबी एवं परिणामोन्मुखी आतंकवाद विरोधी भागीदारी भी विकसित की है। वह यहां इंडो अमेरिकन चैम्बर ऑफ कॉमर्स ऑफ ग्रेटर ह्यूस्टन :आईएसीसीजीएच: के 16वें सालाना सत्र में बोल रहे थे।

वर्मा ने कहा कि स्वाभाविक सहयोगी और बेहतर भागीदार के तौर पर हम वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा से लेकर कृषि, गहरे समुद्र, गहन अंतरिक्ष अन्वेषण, साइबर सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने तक के क्षेत्र में नयी उंचाइयों तक पहुंचाने के लिए अपना सहयोग आगे बढ़ाते रहेंगे हम अपने काम का साथ साथ विस्तार कर रहे हैं, और हम आने वाले दिनों में भी ऐसा करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि हमने एशिया प्रशांत महासागर क्षेत्र में सहयोग के लिए अपने दृष्टिकोण को एक समान किया है और दूसरे विश्व युद्ध के बाद कानून आधारित इस व्यवस्था के लिए खड़े हैं जो दोनों देशों के अनुकूल हो। समारोह में करीब 600 से अधिक प्रख्यात कारोबारियों, सामुदायिक नेताओं को संबोधित कर रहे वर्मा ने कहा हम वैश्विक, राजनीतिक, रणनीतिक और आर्थिक प्रभाव के साथ उभरती शक्ति बनने के भारत के कदम का समर्थन करते हैं। यही वजह है कि राष्ट्रपति ओबामा ने सुधार के पश्चात संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत के लिए स्थायी सदस्यता का स्पष्ट आह्वान किया है।

वर्मा ने कहा पिछले नौ महीनों में हमने अमेरिका भारत साझेदारी के उत्साह की झलक देखी, हमने वह प्रभाव देखा जो हमारे लोग और हमारे कार्यक्रमों से पड़ सकता है और हमने अपनी रणनीतिक भागीदारी का वह बड़ा वादा देखा जो 21 वीं सदी के लिए महत्वपूर्ण रणनीतिक गठबंधन बना है। उन्होंने बताया कि पिछले साल सितंबर में प्रधानमंत्री के वाशिंगटन दौरे के बाद से हमने व्यापार से लेकर पर्यावरण तक करीब 30 विभिन्न कार्यकारी समूहों को या तो शुरू किया है या उन्हें पुन:गतिशील किया है। राष्ट्रपति के जनवरी दौरे के बाद हम कार्य के करीब 80 क्षेत्रों पर विचारविमर्श कर रहे हैं। वर्मा ने कहा, लेकिन शायद सर्वाधिक महत्वपूर्ण बात यह है कि हम अपने समय के महत्वपूर्ण रणनीतिक सवालों पर तेजी से समान राय रखने वाले बन रहे हैं। उन्होंने कहा पिछले एक दशक में हमने कामकाज का मजबूत और दमदार रिकॉर्ड हासिल किया। वर्ष 2005 में हमारा द्विपक्षीय कारोबार करीब 30 अरब डॉलर का था जो अब बढ़ कर 105 अरब डॉलर का हो चुका है।

उन्होंने कहा 10 साल पहले, अमेरिका में करीब 30,000 भारतीय छात्र अध्ययन कर रहे थे लेकिन पिछले साल यह संख्या बढ़ कर 1,05,000 हो गई जो अब तक की भारतीय छात्रों की सर्वाधिक संख्या है। वर्मा ने कहा वर्ष 2005 में अमेरिका आने वाले भारतीयों की संख्या 400,000 लाख के आसपास थी लेकिन पिछले साल यह आंकड़ा 12 लाख हो गया। इसी तरह रक्षा उत्पादों की बिक्री का आंकड़ा शून्य डॉलर से बढ़ कर पिछले कुछ वर्षों में 10 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। वर्मा ने कहा हमारे संबंधों का वास्तविक वादा यह है, जैसा प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था, वैश्विक शांति एवं समृद्धि के लिए हम क्या कर सकते हैं। उन्होंने कहा यही वजह है कि हमारे डॉक्टर अफ्रीका में जच़्चा-बच्चा स्वास्थ्य पर साथ काम कर रहे हैं, हमारी सेना शांतिरक्षकों को प्रशिक्षित करने में मदद कर रही हैं और एशिया में मानवीय एवं आपदा मिशन में साथ काम कर रही हैं, हमारे वैग्यानिक गहन अंतरिक्ष अन्वेषण में, पृथ्वी की निचली कक्षा में मौसम तथा मानसून पर नजर रखने में सहयोग कर रहे हैं। इसीलिए हम आने वाले कल की चुनौतियों से निपटने में अपने युवाओं की मदद के लिए उनकी क्षमता उभारने के लिए मिल-जुल कर काम कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि हम कुछ अच्छी प्रगति कर रहे हैं जो इस तथ्य से रेखांकित हुई है कि हमारी अब तक की पहली रणनीतिक एवं वाणिज्यिक वार्ता सोमवार और मंगलवार को वाशिंगटन डीसी में होगी। वर्मा ने कहा दोनों देशों के बीच रणनीतिक संबंधों में विभिन्न क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करने के बावजूद, अब भी जलवायु परिवर्तन, आय में असमानता तथा कई तरह के अंतरदेशीय खतरों जैसी बाधाएं हैं।

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