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एयरटेल को मिली बड़ी राहत, ग्राहकों के सत्‍यापन के लिए आधार का कर सकेगी नियमित इस्‍तेमाल

भारतीय विशिष्‍ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने टेलीकॉम कंपनी भारती एयरटेल को अपने मोबाइल ग्राहकों का सत्‍यापन आधार के जरिये करने के अधिकार को फि‍र से बहाल करने की मंजूरी दे दी है।

Abhishek Shrivastava
Edited by: Abhishek Shrivastava 31 Mar 2018, 12:24:37 IST

नई दिल्‍ली। भारतीय विशिष्‍ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने टेलीकॉम कंपनी भारती एयरटेल को अपने मोबाइल ग्राहकों का सत्‍यापन आधार के जरिये करने के अधिकार को फि‍र से बहाल करने की मंजूरी दे दी है। कंपनी को यह मंजूरी कुछ शर्तों के साथ मिली है। एयरटेल को आधार कानून के अनुपालन के लिए तिमाही रिपोर्ट देनी होगी और समय-समय पर प्राधिकरण द्वारा जारी निर्देशों का पालन सुनिश्चित करना होगा।

यूआईडीएआई ने एयरटेल पेमेंट बैंक को ई-केवाईसी के लिए आधार के प्रयोग की सुविधा बहाल नहीं की है। पिछले साल दिसंबर में एयरटेल को आधार का इस्‍तेमाल बंद करने के बाद प्राधिकरण ने उसे कुछ समय के‍ लिए इस सुविधा के इस्‍तेमाल की छूट दे दी थी।  

एयरटेल को सत्‍यापन के लिए आधार के उपयोग की अनुमति कुछ शर्तों के साथ दी गई है। इसके तहत आधार कानून के अनुपालन को लेकर कंपनी को अगले आदेश तक तिमाही रिपोर्ट देनी होगी और समय-समय पर प्राधिकरण द्वारा जारी निर्देशों का पालन करना होगा। यूआईडीएआई स्‍वयं या ऑडिटर नियुक्‍त कर रिपोर्ट की जांच कर सकता है।

टेलीकॉम कंपनी एयरटेल और एयरटेल पेमेंट बैंक पिछले साल यूआईडीएआई के निशाने पर तब आ गए थे, जब सुनील भारती के नेतृत्‍व वाली इस कंपनी ने अपने बहुत से मोबाइल उपभोक्‍ताओं की मंजूरी के बिना ही पेमेंट बैंक में उनके खाते खोले और इनमें करोड़ों रुपए की एलपीजी सब्सिडी जमा करवा दी।

सरकार और यूआईडीएआई ने दिसंबर में इस मामले में कड़ी कार्रवाई करते हुए कंपनी को अपने मोबाइल ग्राहकों के सत्‍यापन तथा पेमेंट बैंक के ग्राहकों के ई-केवाईसी के लिए आधार आधारित सत्‍यापन पर रोक लगा दी थी। बाद में एयरटेल को कुछ शर्तों के साथ निश्चित अवधि के लिए अपने मोबाइल ग्राहकों के फि‍र से सत्‍यापन के लिए आधार के प्रयोग की मंजूरी दी थी। इस ताजा कदम से यूआईडीएआई ने कुछ शर्तों के साथ भारती एयरटेल को ई-केवाईसी लाइसेंस को बहाल कर दिया है।   

सूत्रों के अनुसार यूआईडीएआई चाहता था कि एयरटेल के ग्राहकों को कोई असुविधा न हो। इसके अलावा उसने यह भी पाया कि कंपनी ‘महत्वपूर्ण बातों’ का अनुपालन कर रही है और प्राधिकरण को लगातार अद्यतन जानकारी देने की पेशकश की है। इसके बाद उक्त निर्णय किया गया।