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भारत की ‘चेतावनी’, जैश प्रमुख अजहर को लेकर फैसले की घड़ी नजदीक

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने कहा कि आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर पर फैसले की घड़ी नजदीक आ रही है...

Edited by: Khabarindiatv.com [Updated:17 Sep 2017, 4:24 PM IST]
भारत की ‘चेतावनी’, जैश प्रमुख अजहर को लेकर फैसले की घड़ी नजदीक

संयुक्त राष्ट्र: संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने कहा कि आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर पर फैसले की घड़ी नजदीक आ रही है, भले ही संयुक्त राष्ट्र उसके खिलाफ कार्रवाई करने की अनुमति दे या न दे। उन्होंने शनिवार को चेतावनी भरे शब्दों में कहा, ‘हम अजहर का पीछा करेंगे। इस बारे में निश्चिंत रहें। फैसले की घड़ी नजदीक है।’ चीन ने संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंध लगाने में रुकावट डालकर हमेशा आतंकवादी अजहर की सहायता की है, जो 2016 में पंजाब के पठानकोट वायु सेना अड्डे पर हमले का मस्टरमाइंड है। इस हमले में 7 भारतीय मारे गए थे।

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस बारे में पूछे जाने पर अकबरुद्दीन ने यह कहते हुए इस बारे में टिप्पणी करने से इनकार कर दिया कि यह मामला संयुक्त राष्ट्र समिति के सामने लंबित है। हालांकि, उन्होंने पाकिस्तान में रह रहे अजहर को सीधे तौर पर चेतावनी दी। पिछले महीने चीन ने ब्रिटेन, फ्रांस और अमेरिका द्वारा अजहर को अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी घोषित करने और प्रतिबंध लगाकर उसकी संपत्तियों को जब्त करने व उसकी अंतर्राष्ट्रीय यात्राओं पर प्रतिबंध लगाने के प्रस्ताव को रोक दिया था। इस महीने की शुरुआत में हुए BRICS सम्मलेन में हालांकि चीन ने पाकिस्तान आधारित आतंकवादी समूहों में लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद को भी नामित किया।

संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र में जम्मू एवं कश्मीर पर अपेक्षित पाकिस्तानी अभियान के बारे में एक सवाल के जवाब में सैयद अकबरुद्दीन ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र ने दशकों से इस मामले को संज्ञान में नहीं लिया है और इसमें कोई बदलाव नहीं होने जा रहा है। उन्होंने कहा कि जो लोग बीते कल के मामलों पर ध्यान केंद्रित करते हैं, वे बीते कल वाले लोग होते हैं। अगर वे ऐसा ही होना चाहते हैं, तो यही सही। अकबरुद्दीन ने कहा कि भारत एक प्रेरणादायक एजेंडे और प्रगतिशील दृष्टिकोण पर ध्यान केंद्रित करेगा। वहीं, पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए अकबरूद्दीन ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर मुद्दा उठाने का उसका फैसला, जिसपर वहां दशकों से चर्चा नहीं हुई है, 'मियां की दौड़ मस्जिद तक' जैसा है।