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PHOTO: चाइल्ड फ़ाइट क्लब जहां क़िस्मत वाला ही रिंग से बाहर ज़िंदा लौटता है

ज़िंबाब्वे में बच्चों के लिए एक ऐसा क्लब है जिसे वाफ़ा -वाफ़ा कहते हैं। स्थानीय भाषा में वाफडा वाफ़ा का मतलब होता है जो रिंग में उतरेगा, क़िस्मत वाला रहा तो ज़िंदा बाहर निकलेगा।

India TV Sports Desk [Published on:20 Apr 2017, 7:48 PM IST]
PHOTO: चाइल्ड फ़ाइट क्लब जहां क़िस्मत वाला ही रिंग से बाहर ज़िंदा लौटता है

चिटुंगविज़ा, ज़िंबाब्वे: ज़िंबाब्वे में बच्चों के लिए एक ऐसा क्लब है जिसे वाफ़ा -वाफ़ा कहते हैं। स्थानीय भाषा में वाफडा वाफ़ा का मतलब होता है जो रिंग में उतरेगा, क़िस्मत वाला रहा तो ज़िंदा बाहर निकलेगा।

किस उम्र के बच्‍चे ले सकते हैं भाग

इस खेल में हिस्सा लेने वाले बच्चों की उम्र 10-11 साल की होती है। हालंकि अभी तक किसी की जान नहीं गई है लेकिन ख़ून से लथपथ हो जाना आम बात है। 
बच्‍चों को नशे से दूर रखने में सहायक होता है यह अनोखा खेल

ये खेल राजधानी हरारे से कुछ कि.मी. ही दूर है। ज़िंबाब्वे में बहुत बेरोज़गारी है और युवा ड्रग्स और शराब में लग जाते हैं। लेकिन पूर्व बॉक्सिंग चैंपियन अरिगोमा चिपोंदा का कहना है कि बच्चों में इस खेल के प्रति रुझान पैदा करके उन्हें नशे से दूर रखा जा सकता है।

उनके अनुसार "हम उन्हें बॉक्सिंग के ज़रिये अनुशासित रहना सिखाते हैं। एक बार अगर उन्हें इस खेल का चस्का लग गया तो वे नशे में नहीं पड़ेंगे। 

रिंग बारिश की कीचड़ से सना रहता है और रिंग की रस्सियां लोहे के पोल से बंधी रहती हैं जिस पर अगर सिर टकरा जाए तो गंभीर चोट लग सकती है। ज़्यादातर बच्चे नंगे पैर ही लड़ते हैं। उनके बदन पर फटी टी-सर्ट और जीन्स होती है। 

बॉक्सिंग ग्लव्ज़ एक ही साइज़ के होते हैं जिसे सबको पहनना होता है भले ही वह फिट हो न हों। सामान्‍यत: फ़ाइट के दौरान नाक फूट जाती है और ख़ून निकल जाता है। कभी-कभी तो लड़ाई झगड़ा भी हो जाता है। 

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