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मैगी के सैंपल फिर से लैब टेस्ट में हुए फेल, प्रशासन ने ठोका 45 लाख का जुर्माना

पिछले साल नवंबर में मैगी के सैंपल लेकर लैब टेस्ट के लिए भेजे गए थे, सेंपल में एश कंटेंट की मात्रा तय पैमाने से ज्यादा पाई गई है जो खाने में हानिकारक है

Manoj Kumar [Published on:29 Nov 2017, 12:50 PM IST]
मैगी के सैंपल फिर से लैब टेस्ट में हुए फेल, प्रशासन ने ठोका 45 लाख का जुर्माना- IndiaTV Paisa
मैगी के सैंपल फिर से लैब टेस्ट में हुए फेल, प्रशासन ने ठोका 45 लाख का जुर्माना

नई दिल्ली। मैगी नूडल्स खाने में सुरक्षित हैं या नहीं, 2 साल पुराना यह विवाद पिर से सुर्खियों में आ गया है। उत्तर प्रदेश में एक बार फिर से मैगी के सैंपल लैब टेस्ट में फेल हुए हैं जिसके राज्य में शाहजहांपुर के जिला प्रशासन ने मैगी बनाने वाली कंपनी पर नेस्ले पर 45 लाख रुपए का जुर्माना ठोक दिया है। प्रशासन ने नेस्ले के साथ मैगी के डिस्ट्रिब्यूटर पर 15 लाख रुपए और इसे बेचने वाले दो दुकानदारों पर 11 लाख रुपए का जुर्माना ठोका है।

शाहजहांपुर में जिला अथॉरिटी के मुताबिक पिछले साल नवंबर में मैगी के सैंपल लेकर लैब टेस्ट के लिए भेजे गए थे, सेंपल में एश कंटेंट की मात्रा तय पैमाने से ज्यादा पाई गई है जो खाने में हानिकारक है।

समाचार एजेंसी पीटीआई की खबर के मुताबिक मैगी बनाने वाली कंपनी नेस्ले ने इस मामले का बचाव करते हुए कहा है कि उन्हें किसी तरह का ऑर्डर नहीं मिला है लेकिन उनको सूचना है कि जो सैंपल लिए गए हैं वह साल 2015 के हैं, नेस्ले ने कहा है कि ऑर्डर मिलने के बाद वह इस मामले में अपील दाखिल करेंगे। नेस्ले ने एक बार फिर से दोहराया है कि खाने के लिए मैगी 100 फीसदी सुरक्षित है।

मैगी को लेकर विवाद सबसे पहले 2015 में ही छिड़ा था, जून 2015 में FSSAI ने मैगी पर रोक लगा दी थी। उस समय मैगी को लेकर रिपोर्ट आई थी कि इसमें लेड की मात्रा तय पैमाने से ज्यादा पायी गई है और यह खाने के लिए हानिकारक है। इसके बाद नेस्ले ने मैगी को लेकर लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी और नवंबर 2015 में मैगी ने फिर से भारतीय बाजार में लॉन्च हो गई।

ताजा मामले में जिला प्रशासन की तरफ से कहा जा रहा है कि जो सैंपल लिए गए हैं वह पिछले साल यानि 2016 के हैं जबकि नेस्ले की तरफ से कहा जा रहा है कि सैंपल 2015 के हैं। मामले में पूरी सफाई आना अभी बाकी है।

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