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मोटापा से लड़ने वाले नए अणु की हुई पहचान

चूहों पर किए गए प्रयोग में एस्ट्रोजन रिसेप्टर-बीटा द्वारा एक रसायन बीटा-एलजीएनडी2 की सक्रियता मोटापा घटाने और उपापचय की बीमारी कम करने मददगार हो सकती है। इसमें यह रसायन खराब वसा (सफेद वसा) को अच्छे वसा (भूरे वसा) में बदल देता है।...

IANS [Updated:18 Oct 2016, 3:27 PM IST]
मोटापा से लड़ने वाले नए अणु की हुई पहचान

हेल्थ डेस्क: प्राथमिक महिला सेक्स हार्मोन, एस्ट्रोजन रिसेप्टर-बीटा प्रोटीन को एक रसायन के साथ सक्रिय करने से उपापचय की क्रिया बढ़ने की संभावना है। इससे मोटापा घटाने में मदद मिलेगी। यह शोधकर्ताओं का कहना है, जिसमें एक भारतीय मूल के भी हैं। निष्कर्षो से पता चला है कि चूहों पर किए गए प्रयोग में एस्ट्रोजन रिसेप्टर-बीटा द्वारा एक रसायन बीटा-एलजीएनडी2 की सक्रियता मोटापा घटाने और उपापचय की बीमारी कम करने मददगार हो सकती है। इसमें यह रसायन खराब वसा (सफेद वसा) को अच्छे वसा (भूरे वसा) में बदल देता है।

शोधकर्ताओं का कहना है कि यह महत्वपूर्ण है कि भूरा वसा उपापचय को बढ़ा देता और वजन में कमी करता है।

अमेरिका के टेनिसी विश्वविद्यालय के एक शोधकर्ता रमेश नारायणन ने कहा, "हालांकि आमतौर पर एक गलत धारणा है कि मोटापा जीवन के लिए खतरनाक नहीं है, लेकिन मोटापा कई तरह की बीमारियों की मूल वजह है, जिसकी वजह से मृत्यु हो सकती है।"

नारायणन ने कहा, "मोटापे का सुरक्षित और प्रभावी उपचार बहुत जरूरत है और एस्ट्रोजन रिसेप्टर-बीटा की पहचान मोटापे से लड़ने की एक सुरक्षित रणनीति हो सकती है।"

अपनी खोज के लिए नारायणन और सहयोगियों ने चूहे के तीन समूहों का इस्तेमाल किया।

इसमें एक समूह को सामान्य कुतरने वाले आहार दिए गए, जबकि दूसरे दो समूहों को उच्च वसा वाले आहार देकर मोटापा विकसित किया गया। उच्च वसा आहार वाले एक समूह का उपचार बीटा-एलजीएनडी2 से किया गया।

बीटा-एलजीएनडी2 से उपाचार किए गए चूहे दूसरे उच्च वसा आहार वाले चूहों की तुलना में ज्यादा पतले थे। उनके शरीर का तापमान और ऑक्सीजन खपत की मात्रा भी ज्यादा रही। यह उनके उच्च उपापचय दर को प्रदर्शित करता है।

शोध का प्रकाशन ऑनलाइन पत्रिका 'द फासेब (एफएएसईबी)' में हुआ है।

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