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सपा कार्यकर्ता दोबारा जनता के बीच जाकर जीते विश्वास: अखिलेश

लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में सपा की हार के बाद पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव और संस्थापक मुलायम सिंह यादव ने आज दल के नेताओं और कार्यकर्ताओं से मुलाकात की। अखिलेश ने उनसे जनता के बीच दोबारा जाकर पार्टी को नए सिरे से...

Bhasha [Updated:12 Mar 2017, 3:20 PM IST]
सपा कार्यकर्ता दोबारा जनता के बीच जाकर जीते विश्वास: अखिलेश

लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में सपा की हार के बाद पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव और संस्थापक मुलायम सिंह यादव ने आज दल के नेताओं और कार्यकर्ताओं से मुलाकात की। अखिलेश ने उनसे जनता के बीच दोबारा जाकर पार्टी को नए सिरे से मजबूती प्रदान करने को कहा।

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सपा प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी ने बताया कि अखिलेश और मुलायम ने जनेश्वर मिश्र ट्रस्ट परिसर में सपा नेताओं और कार्यकर्ताओं से मुलाकात की और होली की शुभकामनाएं दी।

इस दौरान अखिलेश ने कार्यकर्ताओं से कहा कि सपा एक पार्टी होने के साथ-साथ एक विचारधारा भी है और उसके लिये लगातार संघर्ष जारी रहेगा। पार्टी कारकुन जनता के बीच जाकर दल को नये सिरे से खड़ा करें। संगठन को और चुस्त-दुरस्त किया जाएगा।

चौधरी के मुताबिक अखिलेश ने कहा कि वह विधानसभा चुनाव में पार्टी के खराब प्रदर्शन की समीक्षा करेंगे। इसके अलावा वह प्रदेश की नयी सरकार के एजेंडे और इरादों को देखते हुए अगली रणनीति बनाएंगे।

उन्होंने बताया कि अखिलेश अगले हफ्ते पार्टी के नवनिर्वाचित विधायकों तथा प्रदेश के सभी पार्टी प्रत्याशियों की बैठक बुलाएंगे। हालांकि बैठक के बाद बाहर निकले मुलायम और अखिलेश ने मीडिया से बात करने के इनकार कर दिया।

चौधरी ने कहा कि चुनाव में पार्टी की हार के कई कारण हैं। मुख्य कारण भाजपा नेताओं और मंत्रियों का जनता को बरगलाना रहा। मुद्दाविहीन होने के बावजूद वे जनता को बरगलाने में कामयाब रहे।

चौधरी ने कहा कि वर्ष 1991 में मुलायम सिंह यादव के मुख्यमंत्रित्वकाल में हुए विधानसभा चुनाव में भी उनकी पार्टी को बहुत बुरी हार मिली थी और उसके मात्र 34 विधायक ही चुने गये थे। बाद में मुलायम की अगुवाई में गठित सपा ने वापसी करते हुए तीन बार सरकार बनायी। सपा एक बार फिर उसी तरह वापसी करेगी।

मालूम हो कि वर्ष 2012 में हुए प्रदेश विधानसभा चुनाव में पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में आयी सपा को इस बार विधानसभा चुनाव में मात्र 47 सीटें ही हासिल हुईं। नवम्बर 1992 में वजूद में आयी सपा का यह अब तक का सबसे खराब प्रदर्शन है।

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