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राष्ट्रपति चुनाव: प्रधानमंत्री मोदी ने डाला वोट, कोविंद और मीरा के बीच सीधा मुक़ाबला

भारत के 14वें राष्ट्रपति के लिए आज मतदान होगा। राष्ट्राध्यक्ष के चुनाव के लिए सत्तारुढ़ राजग के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद और विपक्ष की उम्मीदवार मीरा कुमार आमने-सामने हैं।

Written by: India TV News Desk [Updated:17 Jul 2017, 2:18 PM IST]
राष्ट्रपति चुनाव: प्रधानमंत्री मोदी ने डाला वोट, कोविंद और मीरा के बीच सीधा मुक़ाबला

भारत के 14वें राष्ट्रपति के लिए आज  वोटिंग हो रही है। मुक़ाबला NDA के रामनाथ कोविंद और विपक्ष की मीरा कुमार के बीच है। संसद से लेकर विधानसभाओं तक वोट डाले जा रहे हैं। संसद में पहला वोट प्रधानमंत्री मोदी ने डाला तो यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यूपी विधानसभा में मतदान किया। गुजरात से विधायक बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने भी संसद भवन में ही मतदान किया। संसद भवन के कमरा नंबर 62 में वोटिंग हो रही है।

देश का अगला राष्ट्रपति तय करने के लिए सुबह दस बजे से शुरू हुआ मतदान शाम पांच बजे तक चलेगा। संसद भवन से लेकर विधानसभाओं तक पोलिंग बूथ बने हैं और मुख्यमंत्रियों से लेकर मंत्री तक कतार में खड़े होकर वोट डाल रहे हैं। वोटों की गिनती 20 जुलाई को होगी और उसी दिन नतीजे सामने आ जाएंगे।

आंकड़ों में एनडीए के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद का पलड़ा भारी नजर आ रहा है। उनके पक्ष में साठ फीसदी से ज्यादा वोट पड़ने की उम्मीद है इसलिए प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह ने कोविंद को अग्रिम बधाई तक दे डाली है। कांग्रेस उम्मीदवार की हार तय दिख रही है इसलिए सोनिया गांधी ने राष्ट्रपति चुनाव को वैचारिक लड़ाई बता दिया है।

बीजेपी, टीडीपी और शिवसेना सहित एनडीए के घटक दलों का कुल वोट 5 लाख 37 हज़ार 683 हैं। NDA कैंडिडेट को एआईएडीएमके, जेडीयू, टीआरएस, बीजेडी और वाईएसआर कांग्रेस के 1 लाख 46 हज़ार 458 वोट भी मिल रहा हैं यानी कोविंद के पक्ष में कुल वोट 6 लाख 84 हज़ार 141 वोट हैं जो जीत के लिए ज़रूरी 5 लाख 49 हज़ार 442 से काफी ज्यादा है।

कोविंद के मुक़ाबले खड़ी विपक्ष की मीरा कुमार का दावा काफी कमजोर दिख रहा है। मीरा कुमार के पास कांग्रेस, टीएमसी और सीपीएम सहित कुल महज 3 लाख 70 हज़ार 804 वोट हैं जो जीत के लिए काफी नहीं हैं।

चुनाव गोपनीय होता है

राज्यों की विधान परिषद के सदस्य विधान पार्षद इस चुनाव में हिस्सा नहीं लेते। लोकसभा अध्यक्ष जहां इस चुनाव में मत डाल सकता है वहीं एंग्लो-इंडियन समुदाय से लोकसभा में नामित होने वाले दो सदस्यों को मतदान का अधिकार नहीं होता है। राज्यसभा के भी 12 नामित सदस्य इन चुनावों में मतदान नहीं करते। यह चुनाव क्योंकि गोपनीय मतपत्र के जरिए होता है इसलिए पार्टियां अपने सदस्यों को किसी खास उम्मीदवार के पक्ष में मत डालने के लिए विप जारी नहीं करतीं। भाजपा के नेतृत्व वाले राजग के पास शिवसेना को मिलाकर कुल 5,37,683 वोट हैं और उसे करीब 12000 और मतों की जरूरत है। हालांकि बीजद, टीआरएस और वाईएसआर कांग्रेस से समर्थन के वादे और अन्नाद्रमुक के एक धड़े से समर्थन की संभावना राष्ट्रपति चुनावों में वोटों की कमी के अंतर को पूरा कर सकती है।

विशेष मार्कर से जाले जाएंगे वोट

मतदान की तैयारियों के बारे में चुनाव आयोग ने रविवार को कहा कि राष्ट्रपति चुनाव में मत देने वाले सांसदों और विधायकों को मतदान केंद्र के भीतर अपनी कलम ले जाने से मना किया गया है और वे विशेष रूप से डिजाइन किए गए मार्कर से मतपत्र पर निशान लगाएंगे। हरियाणा में पिछले साल आयोजित राज्यसभा चुनावों के दौरान पैदा हुए स्याही विवाद के बाद चुनाव आयोग ने राष्ट्रपति और उप राष्ट्रपति चुनाव में मतदान के लिए विशेष कलम के इस्तेमाल का निर्णय किया है। सोमवार के चुनाव में केवल आयोग की ओर से उपलब्ध कराए गए मतदान सामग्री के इस्तेमाल को सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है। 

हरे और गुलाबी रंग के होंगे मतपत्र

आयोग के एक प्रवक्ता ने नए कानून के बारे में बताया कि मतदान केंद्र में प्रवेश से पहले चुनावकर्मी मतदाताओं से उनकी निजी कलम ले लेंगे और मतपत्र पर निशान लगाने के लिए विशेष कलम दे देंगे। सांसदों को हरे रंग जबकि विधायकों को गुलाबी रंग के मतपत्र दिए जाएंगे। आयोग ने बताया कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रीकर सहित 55 सांसद राष्ट्रपति चुनाव में संसद भवन के बजाय अपने राज्य विधानसभाओं में मतदान करेंगे। पांच विधायक अपना मत संसद भवन में और चार अन्य विधायक अपना मत ऐसी राज्य विधानसभाओं में डालेंगे जहां से वे निर्वाचित नहीं हुए हैं। 

राष्ट्रपति चुनाव के नियमों के मुताबिक सांसद या विधायक आयोग से यह कह सकते हैं कि एक अपवाद के तौर पर वह उन्हें किसी अन्य स्थान पर मतदान करने की इजाजत जी दाए। चुनाव आयोग के दस्तावेज के मुताबिक उसने 14 राज्यसभा और 41 लोकसभा सदस्यों को  संसद भवन की बजाय राज्य विधानसभाओं में वोट डालने की इजाजत दी है। इनमें पर्रीकर, आदित्यनाथ और उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य शामिल हैं जिन्होंने संसद की अपनी सदस्यता नहीं छोड़ी है। पर्रीकर राज्यसभा के सदस्य हैं जबकि आदित्यनाथ और मौर्य लोकसभा सदस्य हैं। बाकी जो सांसद अपने राज्य की विधानसभाओं में मत डालेंगे उनमें ज्यादातर तृणमूल कांग्रेस के हैं।

​25 जुलाई को देश के मुख्य न्यायाधीश नए राष्ट्रपति को शपथ दिलाएंगे

चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने के बाद संसद के केंद्रीय कक्ष में दोनों सदनों के सांसद 23 जुलाई को मौजूदा राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को विदाई देंगे। इसके बाद 25 जुलाई को देश के मुख्य न्यायाधीश नए राष्ट्रपति को शपथ दिलाएंगे। लोकसभा सचिवालय की ओर से महासचिव अनुप मिश्रा के हवाले से जारी प्रपत्र के अनुसार, 23 जुलाई को शाम साढ़े पांच बजे संसद के केंद्रीय कक्ष में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को विदाई दी जाएगी। परंपरा के अनुसार, लोकसभा अध्­यक्ष सुमित्रा महाजन राष्­ट्रपति मुखर्जी के लिए एक विदाई भाषण देंगी।इस समारोह में सरकार के तमाम आला अधिकारी और दोनों सदनों के सांसद मौजूद रहेंगे। प्रणब मुखर्जी को एक स्मृति चिन्ह और एक सिग्­नेचर बुक भी दी जाएगी जिस पर सभी सांसदों के हस्­ताक्षर होंगे। विदाई समारोह के बाद राष्­ट्रपति मुखर्जी अपने सम्­मान में आयोजित एक चाय समारोह में शिरकत करेंगे। मतगणना का दौर 20 जुलाई को सुबह दस बजे संसद के कमरा नंबर 62 में शुरू होगा। विधानसभाओं में भी वोटों की गिनती जारी रहेगी।