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म्यांमार से आए रोहिंग्या मुसलमान, छिड़ा सियासी घमासान

देश के अंदर ही रोहिंग्या को लेकर सियासी घमासान भी छिड़ गया है। कुछ सियासी धड़े रोहिंग्या मुसलमानों के समर्थन में खड़े हो गए हैं।

Written by: India TV News Desk [Updated:16 Sep 2017, 3:58 PM IST]
म्यांमार से आए रोहिंग्या मुसलमान, छिड़ा सियासी घमासान

बॉर्डर पार कर देश में घुसने वाले रोहिंग्या शरणार्थियों को लेकर केंद्र और राज्य सरकार हरकत में आ गई है। पहले देश में म्यांमार से आकर बसे शरणार्थियों को बाहर करने की कोशिश हो रही थी लेकिन अब बॉर्डर पर भी सुरक्षा बलों को बॉर्डर पार कर किसी को भी देश में घुसने से रोकने का आदेश दिया है। असम और मणिपुर सरकार ने भी पुलिस को आदेश दे दिया है कि जो भी सीमा पार से घुसे उसे पीछे धकेल दिया जाए। 

इस बीच  देश के अंदर ही रोहिंग्या को लेकर सियासी घमासान भी छिड़ गया है। कुछ सियासी धड़े रोहिंग्या मुसलमानों के समर्थन में खड़े हो गए हैं। असदुद्दीन ओवैसी और  ममता बनर्जी रोहिंग्या मुसलमानों के समर्थन में उतर आए हैं। .ममता ने ट्वीट कर कहा- रोहिंग्या इंसान हैं, आतंकवादी नहीं... हमें यूनाइटेड नेशन की उस अपील का समर्थन करना चाहिए जिसमें रोहिंग्या मुसलमानों की मदद करने की बात कही गई है।"

दूसरी तरफ ओवैसी ने हैदराबाद की पब्लिक मीटिंग में प्रधानमंत्री मोदी और केंद्र सरकार पर डायरेक्ट अटैक किया। ओवैसी ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार रोहिंग्या रिफ्यूजी को सिर्फ इसलिए देश से बाहर निकालना चाहती है, क्योंकि वो मुसलमान हैं। इस पर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि ओबैसी वोट बैंक के चक्कर में भारत को धर्मशाला बनाना चाहते हैं लेकिन सरकार ऐसा नहीं होने देगी। आरएसएस नेता इंद्रेश कुमार ने कहा कि जितने मुस्लिम देश हैं पहले वो रोहिंग्या मुसलमानों को अपने अपने यहां शरण दें।
  
रोहिंग्या पर खुफिया अलर्ट 

खुफिया एजेंसियों से मिले अलर्ट के मुताबिक आतंकी संगठन रोहिंग्या संकट का फायदा उठाकर शरणार्थियों का इस्तेमाल आतंकी घटनाओं में कर सकते हैं जिससे देश की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा पैदा हो सकता है।

खास बात ये है कि असम और मणिपुर सरकार का रोहिंग्या के खिलाफ फरमान उस वक्त आया है जब इस पूरे संकट पर सरकार को सुप्रीम कोर्ट में 18 सितंबर को हलफनामा दायर करना है।

क़रीब 40 हज़ार रोहिंग्या भारत में ग़ैर-क़ानूनी रूप से रह रहे हैं। ज़्यादातर रोहिंग्या जम्मू-कश्मीर, हैदराबाद, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली-एनसीआर और राजस्थान में रहते हैं।

भारत सरकार के मनाही के बाद एमनेस्टी इंटरनेशनल ने रोहिंग्या मुसलमानों को शरण देने की गुजारिश की है। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा है कि मोदी रोहिंग्या मुसलमानों की सुरक्षा पक्की करें और म्यांमार के नेतृत्व पर भी दबाव डालें कि वो हिंसा प्रभावित राखाइन प्रांत के रोहिंग्या मुसलमानों की मदद करें।

लेकिन भारत सरकार ने एमनेस्टी इंटरनेशनल के इस अपील को सिरे से खारिज कर दिया है। गृह राज्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा, ''मैं अंतरराष्ट्रीय संगठनों को कहना चाहता हूं कि रोहिंग्या संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कमीशन में पंजीकृत हैं या नहीं... वो भारत में ग़ैर-क़ानूनी रूप से आये अप्रवासी हैं... भारत में दुनिया के सबसे ज़्यादा रिफ़्यूज़ी रहते हैं... इसलिए किसी को भी भारत को ये नहीं सिखाना चाहिये कि हम अप्रवासियों से कैसे निपटें...।''
  
सरकार के फरमान के बाद देश के कई संगठन रोहिंग्या मुसलमानों को शरण देने के समर्थन में सामने आ गए हैं.. मानवता और इंसानियक की दुहाई दी जा रही है ताकि सरकार फैसला बदलने पर मजबूर हो जाए। कुछ लोग तो सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गए हैं लेकिन खुफिया इनपुट से मिले खतरे के संकेत को देखते हुए सरकार फैसला बदलेगी ऐसा लगता नहीं।

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