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नोटबंदी छोड़कर मोदी सरकार की सारी योजनाएं UPA से ली हुईं: कांग्रेस

कांग्रेस ने केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार पर आज आरोप लगाया कि नोटबंदी को छोड़कर पिछले तीन साल में सिर्फ कांग्रेस नीत संप्रग सरकार की योजनाओं का नाम बदलने के अलावा उसने कुछ नहीं किया और इन योजनाओं को सही प्रकार से लागू...

Reported by: Bhasha [Updated:20 Sep 2017, 9:01 PM IST]
नोटबंदी छोड़कर मोदी सरकार की सारी योजनाएं UPA से ली हुईं: कांग्रेस

नई दिल्ली: कांग्रेस ने केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार पर आज आरोप लगाया कि नोटबंदी को छोड़कर पिछले तीन साल में सिर्फ कांग्रेस नीत संप्रग सरकार की योजनाओं का नाम बदलने के अलावा उसने कुछ नहीं किया और इन योजनाओं को सही प्रकार से लागू भी नहीं किया जा रहा।

कांग्रेस प्रवक्ता राजीव शुक्ला ने आज संवाददाताओं से कहा कि मोदी सरकार ने 2014 के आम चुनाव से पहले संप्रग सरकार की विभिन्न योजनाओं की तमाम तरह से आलोचना की थी। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने सत्ता में आने के बाद पिछली सरकार की 23 प्रमुख योजनाओं का नाम बदलकर उन्हें लागू कर दिया। मनरेगा जैसी योजनाओं का नाम वह कुछ कारणों से नहीं बदल पाए।

उन्होंने कहा कि इस सरकार ने केवल एक नई चीज दी है-नोटबंदी। उन्होंने कहा कि इस नोटबंदी के क्या-क्या प्रभाव हुए, यह आप किसी भी भारतीय से पूछ सकते हैं। शुक्ला ने कहा कि मोदी सरकार ने पुरानी इंदिरा आवास योजना का नाम प्रधानमंत्री आवास योजना कर दिया। इसी प्रकार राजीव गांधी आवास योजना का नाम सरदार पटेल राष्ट्रीय शहरी आवास मिशन, राष्ट्रीय कौशल विकास मिशन का नाम स्किल इंडिया, राष्ट्रीय बालिका दिवस कार्यक्रम को बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ कर दिया गया।

उन्होंने कहा कि भाजपा पहले आधार कार्ड का यह कहकर विरोध करती है कि इसका आतंकवादी दुरूपयोग कर सकते हैं। किन्तु साा में आने के बाद उसी भाजपा की सरकार हर योजना को आधार से जोड़ रही है।

वित्त मंत्री अरुण जेटली की इस टिप्पणी के बारे में पूछे जाने पर कि पेट्रोल पदार्थों के दामों में वृद्धि का विरोध कर रही कांग्रेस को अपने शासन वाले राज्यों में इस पर कर कम क्यों नहीं कर रही है, शुक्ला ने कहा कि कांग्रेस से ज्यादा तो भाजपा की राज्यों में सरकारें हैं। भाजपा को हमें नसीहत देने के पहले स्वयं अपनी पार्टी के शासन वाले राज्यों में इस पर कटौती कर उपभोक्ताओं को लाभ देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि संप्रग सरकार के शासनकाल में कच्चे तेल के अंतरराष्ट्रीय मूल्य 120 से 150 डालर प्रति बैरल तक पहुंच गये थे। किन्तु वर्तमान सरकार के शासन काल में तो इसके अंतरराष्ट्रीय दाम बहुत कम हैं। फिर भी देश के उपभोक्ताओं से वही मूल्य वसूले जा रहे हैं जो संप्रग के शासनकाल में थे। वैसे वित्तमंत्री रहते हुए प्रणब मुखर्जी ने भी राज्यों को उस समय पेट्रोलियम पदार्थों पर मूल्य घटाने के लिए कहा था। शुक्ला ने कहा कि उपभोक्ताओं को राहत देते हुए संप्रग सरकार ने पेट्रोलियम पदार्थों पर सीमा शुल्क कम किया था।

प्रिंस्टन विश्विद्यालय में राहुल के भाषण के बारे में पूछे गए प्रश्न के उार में शुक्ला ने कहा, उन्होंने अपने संबोधन में बहुत जरुरी मुद्दा उठाया है। आज सबसे बड़ी समस्या रोजगार की है। जब मैं योजना मंत्री था तब भी ये आंकड़ा आया था कि युवा आबादी ढाई प्रतिशत की दर से बढ़ रही है। देश में अगर उन्हें हम नौकरी नहीं दे पाए तो बहुत मुश्किल होगी। अभी के आंकड़ों के हिसाब से 30 हजार युवा हर रोज नौकरी की लाइन में लग रहा है, लेकिन सरकार केवल दस प्रतिशत को नौकरी का इंतजाम कर पा रही हैं। वह भी निजी क्षेत्र में अधिकतर नौकरी पैदा हो रही हैं।

उन्होंने कहा, राहुल ने कोई राजनीतिक आरोप नहीं लगाया। उन्होंने ने कहा कि देश में बेरोजगारी बड़ी समस्या है। हम सब मिलकर इसका हल निकालें। एक अन्य प्रश्न के उार में शुक्ला ने कहा, राहुल ने बोला है उसकी आपको तारीफ करनी चाहिए। उन्होंने जनता से कहा कि हमारे अंदर शायद अहंकार आ गया था। उन्होंने एक गलती को स्वीकार किया है। नौकरी की समस्या वास्तव में खत्म नहीं हुई है। उनका कहने का अर्थ ये है कि हम भी समस्या से जूझ रहे थे, हम भी पूरी तरह से नौकरियां नहीं दे पाए, लेकिन जो हमारा नौकरी देने का अनुपात था, वो सबसे ज्यादा था। इस सरकार ने तो दो करोड़ नौकरी प्रति वर्ष देने का वायदा किया था, ये तो कुछ लाख ही दे पा रहे हैं। वो भी ज्यादातर निजी क्षेत्र में दे रहे हैं।

गुजरात विधानसभा चुनाव के बारे में पूछे गए प्रश्न के उत्तर में शुक्ला ने कहा कि गुजरात में जो चुनाव हाेगा, वह कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधा चुनाव हाेगा। अब वाघेला पार्टी छाेड़ कर चले गए। तीसरी पार्टी बनाकर वाेट काटने की बात हाेती है। आप समझदार हैं, समझदार काे इशारा ही काफी हाेता है। हमने उनकाे मंत्री बनाया, सारे पद दिए। पार्टी भला और क्या दे सकती है।

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