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देश में स्वाईन फ्लू की फिर दस्तक, जनवरी से अबतक 100 मौतें

इस साल के प्रथम तीन महीनों में ही महाराष्ट्र में स्वाईन फ्लू से होने वाली मौतों की संख्या चार गुना हो गई है। 2016 में 25 मौतों की तुलना में इस साल पहली जनवरी से 10 अप्रैल तक 100 से ज्यादा मौतें दर्ज...

IANS [Published on:12 Apr 2017, 10:46 PM IST]
देश में स्वाईन फ्लू की फिर दस्तक, जनवरी से अबतक 100 मौतें

नई दिल्ली: इस साल के प्रथम तीन महीनों में ही महाराष्ट्र में स्वाईन फ्लू से होने वाली मौतों की संख्या चार गुना हो गई है। 2016 में 25 मौतों की तुलना में इस साल पहली जनवरी से 10 अप्रैल तक 100 से ज्यादा मौतें दर्ज की गई हैं। जानकारी के मुताबिक, अब तक 7581 संभावित मामले सामने आए हैं और 23000 से ज्यादा लोगों ने एच1एन1 एनफ्लुएंजा का टीका लिया है।

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एनफ्लुएंजा वायरस से होने वाली सांस प्रणाली की बीमारी स्वाईन फ्लू सांस प्रणाली को इस तरह प्रभावित करती है कि सूखी गंभीर खांसी, पाचन में कमी और नाक से तरल बहने लगता है। यह हवा, त्वचा और दूषित सतह से आसानी से फैल सकता है। अन्य कारणों के अलावा विशेषज्ञों ने दिन-रात के तापमान में बड़े अंतर को इसकी प्रमुख वजह माना है, जिस माहौल में उच्चतम और न्यूनतम तापमान में भारी अंतर हो, वहां पर इसके वायरस के पनपने को बढ़ावा मिलता है।

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के अध्यक्ष डॉ. के.के. अग्रवाल ने कहा, "स्वाईन फ्लू सांस प्रणाली की बीमारी है, जिसकी शुरुआत सूअरों से हुई। लेकिन यह मानवों की बीमारी बन चुकी है, जो खांसी और छींक से फैलती है। इसके लक्षण मौसमी फ्लू बुखार, खांसी, खराब गला, बदन दर्द और सिहरन जैसे ही होते हैं। कई बार जी मिचलाना, उल्टी, दस्त, दाने आदि भी हो सकते हैं।"

उन्होंने कहा, "गर्भवती महिलाओं, पांच साल से कम उम्र के बच्चों, उम्रदराज लोगों और गंभीर बीमारी वालों को यह रोग होने की संभावना ज्यादा होती है। केवल गला खराब होना ही स्वाईन फ्लू का लक्षण नहीं है। सामान्य फ्लू वाले लोगों को एंटीबायटिक्स की आवश्यकता नहीं होती। लेकिन सांस फूलने की गंभीर समस्या और खांसी में रक्त आना प्रमुख संकेत हैं और विस्तृत जांच और अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता होती है। ये लक्षण एक-दो सप्ताह तक रहते हैं।"

अग्रवाल का कहना है, "मौसमी वायरल के इलाज के लिए प्रयोग की जाने वाली एंटीवायरल दवाएं एच1एन1 के इलाज में भी काम आती हैं। ओसेल्टामिवीर (टैमीफ्लू), पेरामिविर (रेपिवैब) और जानामीविर (रेलेंजा) काफी कारगर साबित होती हैं। मानवों की वजह से फैले फ्लू को रोकने के लिए एनफ्लुएंजा वैक्सीन काम आ सकती है, जिसे छह साल से ज्यादा उम्र के बच्चों और 50 साल से अधिक उम्र के बुजुर्गो, पल्मनरी रोगियों, दिल के रोगियों, गुर्दे, हिपेटिक, न्यूरोलॉजिकल, हीमेटॉलोजिक विकार और डायबिटीज पीड़ितों, गर्भवती महिलाओं और स्वास्थ्य सेवा कर्मियों को देने की सलाह दी जाती है। नाक से सप्रे होने वाली कम क्षमता वाली सजीव एनफ्लुएंजा वैक्सीन, गर्भवती महिलाओं को छोड़कर, सभी 2 से 49 साल तक उम्र के लोगों को दी जा सकती है।"

डॉक्टर अपनी मर्जी से दवा ना लेने की सलाह देते हैं। चूंकि अन्य फ्लू के लक्षण स्वाईन फ्लू के लक्षण जैसे लग सकते हैं, इसलिए सही जांच के लिए डॉक्टर के पास जाना आवश्यक होता है।

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