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श्रीनगर में पटरी पर लौटता जनजीवन, मौजूदा स्थिति में आया काफी सुधार

श्रीनगर: जम्मू और कश्मीर की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर में आज सार्वजनिक गतिविधयों में बढ़ोतरी के साथ ही जनजीवन के वापस पटरी पर लौटने के संकेत मिले। हालांकि अलगाववदी गुटों द्वारा आहूत बंद के कारण सामान्य

Bhasha [Published on:30 Nov 2016, 2:26 PM IST]
श्रीनगर में पटरी पर लौटता जनजीवन, मौजूदा स्थिति में आया काफी सुधार - India TV

श्रीनगर: जम्मू और कश्मीर की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर में आज सार्वजनिक गतिविधयों में बढ़ोतरी के साथ ही जनजीवन के वापस पटरी पर लौटने के संकेत मिले। हालांकि अलगाववदी गुटों द्वारा आहूत बंद के कारण सामान्य जनजीवन के कुछ अन्य पहलू बाधित भी रहे। अधिकारियों ने कहा, श्रीनगर और अन्य स्थानों पर सार्वजनिक वाहनों की आवाजाही में काफी बढ़ोतरी दिखी। कैब और ऑटो-रिक्शा के अलावा बड़ी संख्या में बसें भी सड़कों पर नजर आई। उन्होंने बताया कि ग्रीष्मकालीन राजधानी को घाटी के अन्य जिलों से जोड़ने वाले अंतर-जिला परिवहनों में भी काफी सुधार देखने को मिला। कश्मीर के कई इलाकों में अधिकतर दुकानें, पेट्रोल पंप और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे, वहीं शहर के कुछ अंदरूनी इलाकों, सिविल लाइन में और शहर की बाहरी सीमा के कुछ इलाकों में ये खुलें भी।

उन्होंने कहा, स्थिति में काफी सुधार आया है। अब दुकानें भी अधिक खुल रही हैं और प्रतिदिन सड़कों पर वाहनों की संख्या में भी बढ़ोतरी हो रही है, वहीं कुछ इलाकों में आज जाम भी लगा। पथविक्रेता भी अपनी दुकानें लगा रहे हैं। ये सभी चीजें स्थिति के सामान्य होने की ओर संकेत कर रही हंै। हालांकि अधिकतर स्कूल और अन्य शैक्षिण संस्थान बंद रहे। उन्होंने बताया कि घाटी के अन्य जिला मुख्यालयों से भी सार्वजनिक गतिविधयों में बढ़ोतरी की ऐसी ही रिपोर्ट मिली है।

हिज्बुल मुजाहिद्दीन के चरमपंथी बुरहान वानी के आठ जुलाई को सुरक्षा बलों के साथ हुई मुठभेड़ में मारे जाने के बाद से ही बंद का नेतृत्व कर रहे अलगाववादी गुट सप्ताह भर का विद्रोह-कार्यक्रम जारी करते हैं। सप्ताह में कुछ दिन वे बंद में ढील भी देते हैं। उन्होंने आज शाम चार बजे से बंद में 15 घंटे की ढील देने का ऐलान किया है। घाटी में जारी अशांति में दो पुलिसकर्मियों समेत 86 लोगो की मौत हो चुकी है और कई हजार लोग घायल भी हुए हैं। सुरक्षा बलों के भी करीब 5000 कर्मी झड़पों में घायल हुए हैं।

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