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राजस्थान में विरोध का अनोखा तरीका, सुबह-सुबह घर के बाहर पहुंचे विधायक और सांसद

जी हां ये बिल्कुल सच है। दरअसल यहां के लोग आवारा पशुओं से परेशान है। कई लोग घायल हो गए हैं और कई लोगों की मौत तक हो चुकी है। नगर निगम से लेकर विधायक तक से शिकायत कर चुके हैं लेकिन किसी...

Written by: India TV News Desk [Updated:12 Oct 2017, 8:49 AM IST]
राजस्थान में विरोध का अनोखा तरीका, सुबह-सुबह घर के बाहर पहुंचे विधायक और सांसद

नई दिल्ली: राजस्थान के भरतपुर में लोग सुबह-सुबह जब सोकर उठे और बाहर अखबार लेने के लिए निकले तो बाहर रोड पर भरतपुर विधायक तथा भरतपुर सांसद, महापौर सहित नगर निगम के आयुक्त को देखकर लोग चौंक गए। जी हां ये बिल्कुल सच है। दरअसल यहां के लोग आवारा पशुओं से परेशान है। कई लोग घायल हो गए हैं और कई लोगों की मौत तक हो चुकी है। नगर निगम से लेकर विधायक तक से शिकायत कर चुके हैं लेकिन किसी ने भी लोगों को शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया। ये भी पढ़ें: हनीप्रीत ने राम रहीम के साथ नायजाज रिश्ते को कबूला, उगले सारे राज?

इसी के विरोध में अब यहां के लोगों ने पशुओं का नामकरण कर दिया है। किसी को एमएलए का नाम दे दिया है, किसी को कमिश्नर का, किसी को नगर निगम के पार्षद का, किसी को सांसद का और अब जिस भी जानवर से कोई घायल होगा उसके खिलाफ कोर्ट में लोग दरवाजा खटखटाएंगे।

जी हां यह बिल्कुल विरोध करने का यह नया तरीका लोगों ने निकाला है। लोगों ने विरोध प्रदर्शन करने और अपनी मांग के लिए एक अनूठी पहल शुरू की है जिसके अंतर्गत आज शहर में आवारा जानवरों के आतंक को लेकर जनता आंदोलन संगठन ने अनूठे तरीके से आंदोलन कर चर्चाएं शुरू कर दी है। जनता आंदोलन के कार्यकर्ताओं ने शहर में घूम रहे आवारा सांडों के गले में नेताओं व अधिकारियों के नामों की पट्टियां लटकाकर अपना विरोध जताया।

सांसद बहादुर सिंह कोली, विधायक विजय बंसल, नगर निगम के मेयर शिव सिंह भोंट, नगर निगम के आयुक्त शिवचरण मीणा के नामों की लिखी पट्टियां इन आवारा सांडों की गले में लटकाई गई है। जनता आंदोलन संगठन के संयोजक व् पूर्व पार्षद राघवेंद्र सिंह का कहना है कि शहर में आवारा जानवरों का जोरदार आतंक है और कई लोगों की जान भी इन आवारा जानवरों की वजह से जा चुकी है।

राघवेंद्र सिंह ने कहा कि अनगिनत बार जिला प्रशासन व नगर निगम को शहर में आवारा जानवरों की समस्या से अवगत कराया जा चुका है लेकिन किसी ने भी इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया है। गौरतलब है कि पूर्व में भी जनता आंदोलन द्वारा दशहरा के मौके पर सांसद विधायक और मेयर को रावण कुंभकरण व मेघनाथ की उपाधि देकर उनके पुतले जलाकर विरोध प्रदर्शन किया था।

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