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चुनाव में टिकट देने की एवज में पैसे मांगने वालों पर नोटबंदी से पड़ी करारी मार: पीएम मोदी

Bhasha [ Updated 20 Nov 2016, 20:57:46 ]
चुनाव में टिकट देने की एवज में पैसे मांगने वालों पर नोटबंदी से पड़ी करारी मार: पीएम मोदी - India TV

आगरा: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज कहा कि 500 और 1000 रुपये के पुराने नोट बंद करने के उनके फैसले से ऐसी पार्टियों को करारी मार पड़ी है जिनके नेता टिकट के एवज में पैसे मांगते हैं। अगले साल की शुरूआत में उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और मोदी की इस टिप्पणी को बसपा प्रमुख मायावती पर परोक्ष हमले के तौर पर देखा जा रहा है। मायावती पर टिकट के एवज में पैसे मांगने के आरोप लगते रहे हैं।

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यहां एक रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि नोटबंदी का मकसद आम लोगों को परेशान करना नहीं, बल्कि आने वाली पीढि़यों का उज्ज्वल भविष्य सुनिश्चित करने के लिए उन्हें 50 दिन कष्ट सहना होगा। मोदी ने भरोसा जताया कि भ्रष्टाचार और काले धन को खत्म करने का मकसद पूरा होकर रहेगा।

उन्होंने कहा, मुझे पता है कि (नोटबंदी के कारण) कुछ लोगों ने सब कुछ खो दिया है। (यदि) आपको विधायक बनना है, तो इतने नोट लाओ, तब आप विधायक बनोगे। नोट जमा किए गए थे। इन नोटों का क्या होगा? ये नोट किनके थे? क्या ये गरीब और ईमानदार लोगों के नहीं थे? यह खेल खत्म होना चाहिए।

मोदी ने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनकी टिप्पणियों को मायावती पर निशाना माना जा रहा है, जिन पर विधानसभा चुनाव का टिकट देने की एवज में पैसे लेने के आरोप लगते रहे हैं। बसपा के नेता रहे स्वामी प्रसाद मौर्य ने मायावती पर विधानसभा चुनाव के लिए टिकटों की नीलामी का आरोप लगाया था। बीते 22 जून को बसपा छोड़ने के अपने फैसले के ऐलान के वक्त मौर्य ने यह आरोप लगाया था। मायावती ने इन आरोपों को सिरे से नकारा है।

मोदी ने कहा, यह इस बात को सुनिश्चित करने की हमारी कोशिश है कि मध्य वर्ग को उसका पूरा हक मिले, गरीबों की आकांक्षाएं पूरी हो और मध्य वर्ग का शोषण थमे। यह काली अर्थव्यवस्था देश को भीतर से खोखला कर रही है।

प्रधानमंत्री ने कहा, मैंने किसी को परेशान करने के लिए यह फैसला नहीं किया है। मैंने आने वाली पीढ़ियों और हमारे नौजवानों का भाग्य बदलने के लिए यह फैसला किया है। लोगों को पुराने नोट बदलने और नगद हासिल करने में आ रही मुश्किलों पर मोदी ने कहा, मैंने 50 दिन का वक्त मांगा था कि नहीं? यह इतना बड़ा देश है और फैसला इतना बड़ा है तो कुछ कष्ट तो होगा ही।

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