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नोटबंदी के खिलाफ सूरत में किसानों का हल्लाबोल, फसल और दूध कलेक्टर ऑफिस के बाहर फेंका

सूरत: गुजरात के सूरत में शनिवार को किसानों के साथ मिलकर कांग्रेस ने नोटबंदी के खिलाफ जबरदस्‍त प्रदर्शन किया। नोटबंदी का विरोध करते हुए कांग्रेसी कार्यकर्ता और किसानों ने रैली निकाली और दूध से भरा

India TV News Desk [Updated:19 Nov 2016, 8:26 PM IST]
नोटबंदी के खिलाफ सूरत में किसानों का हल्लाबोल, फसल और दूध कलेक्टर ऑफिस के बाहर फेंका

सूरत: गुजरात के सूरत में शनिवार को किसानों के साथ मिलकर कांग्रेस ने नोटबंदी के खिलाफ जबरदस्‍त प्रदर्शन किया। नोटबंदी का विरोध करते हुए कांग्रेसी कार्यकर्ता और किसानों ने रैली निकाली और दूध से भरा कैन कलेक्‍टर ऑफिस के बाहर फेंका। साथ ही गेंहू की बोरियां फाड़कर सड़क पर बिखेर दिया। केंद्र सरकार और आरबीआई के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की। (देश-विदेश की बड़ी खबरें पढ़ने के लिए क्लिक करें)

दूध गिराया..गेहूं बिखेरा, रैली निकालकर प्रदर्शन

सूरत में किसानो ने रैली निकाल कर केंद्र सरकार और आरबीआई के उस फैसले का विरोध किया जिसमें डिस्ट्रिक्ट को ऑपरेटिव बैंकों से 500 और 1000 रूपये की नोट को बदलने पर रोक लगाई है । सूरत के जहांगीरपुरा से निकली इस रैली में किसानों ने ट्रकों में गन्ने भरे थे, ट्रेक्टरों में धान के बोरे भरे तो टेम्पो में दूध से भरी कैने भरी हुई थी।

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केंद्र और आरबीआई के फैसले के खिलाफ रैली निकालने वाले किसान नेताओं का कहना है कि डिस्ट्रिक्ट को ऑपरेटिव बैंकों में किसानों के खाते है और उन्ही खातों में सरकार ने नोट बदलने पर रोक लगा रखी है जिससे किसानों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अगर सरकार ने आगामी 7 दिन के भीतर किसानो के हित में निर्णय नहीं लिया तो उसके बाद दिल्ली और मुंबई के लोगो को दूध सप्लाई करने वाली अमूल कंपनी को दूध देना बंद कर देंगे।

राजनैतिक होता नजर आया विरोध का सुर

किसानो की रैली में शामिल होने आए सूरत शहर कांग्रेस के अध्यक्ष हंसमुख देसाई से जब किसानों की रैली को लेकर कांग्रेस के समर्थन की बात पूछी गई तो बगले झांकते नज़र आए। जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि वो खुद एक किसान है और किसान होने के नाते इस रैली में शामिल होने आए है।

नोटबंदी से यूं तो देश की जनता काफी परेशान है और इस परेशानी से किसान अछूता नहीं है। सूरत में निकली यह रैली भी किसानों की परेशानी बयां कर रही है। हालांकि रैली में महज कांग्रेसी नेताओं के शामिल होने के चलते विरोध का सुर राजनैतिक होता नजर आया।

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