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संयुक्त राष्ट्र की बैठक में की गई जलवायु परिवर्तन से तत्काल प्राथमिकता के आधार पर निपटने की अपील

Bhasha 18 Nov 2016, 12:45:09
Bhasha

माराकेश: विश्व के करीब 200 देशों ने यहां संयुक्त राष्ट्र की एक सभा में जलवायु परिवर्तन से तत्काल प्राथमिकता के आधार पर निपटने के लिए आज सर्वाधिक राजनीतिक प्रतिबद्धता की अपील की और रेखांकित किया कि वैश्विक जलवायु चेताने वाली एवं अभूतपूर्व दर से गर्म हो रही है।

कांफ्रेंस ऑफ पार्टीज (सीओपी) के पूर्ण सत्र में माराकेश कार्य घोषणा पढ़ी गई जिस पर शिखर सम्मेलन में भाग ले रहे सभी पक्षों यानी 196 देशों एवं ईयू समूह ने सहमति जताई। इसमें कहा गया कि ग्लोबल वार्मिंग से निपटने पर तत्काल कार्रवाई करना दायित्व है।

इसे जलवायु परिवर्तन पर जारी अहम शिखर सम्मेलन के अहम परिणामों में से एक माना जा सकता है।

घोषणा में कहा गया है, हमारी जलवायु चेताने वाली एवं अभूतपूर्व दर से गर्म हो रही है और इस संबंध में तत्काल कदम उठाना हमारा दायित्व बनता है। हम जलवायु परिवर्तन से तत्काल प्राथमिकता के आधार पर निपटने के लिए सर्वाधिक राजनीतिक प्रतिबद्धता की अपील करते हैं।

घोषणा में कहा गया है, हम जलवायु परिवर्तन से सर्वाधिक प्रभावित होने वाले देशों के साथ मजबूत एकजुटता दिखाने की अपील करते हैं और उनकी अनुकूलन क्षमता बढ़ाने एवं उनके जोखिम को कम करने के प्रयासों को समर्थन देने की आवश्यकता रेखांकित करते हैं।

इसमें कहा गया है, संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन प्रारूप सम्मेलन की कांफ्रेंस ऑफ पार्टीज के 22वें सत्र के उच्च स्तरीय अनुभाग के लिए माराकेश में एकत्र हुए हम, राष्ट्र प्रमुख, सरकार एवं प्रतिनिधि मंडल जलवायु परिवर्तन से निपटने एवं सतत विकास पर कार्य एवं क्रियान्वयन के नए दौर की ओर स्थानांतरण का संकेत देने के लिए यह घोषणा जारी करते हैं।

देशों ने पेरिस समझौते, इसके तेजी से लागू होने, महत्वाकांक्षी लक्ष्यों, समावेशी प्रकृति और समान एवं साझी लेकिन अलग-अलग जिम्मेदारियों एवं अपनी-अपनी क्षमताओं की इसकी भावना का स्वागत किया। उन्होंने इसके पूर्ण क्रियान्वयन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी व्यक्त की।

भारत ने पहले की गई राजनीतिक घोषणा के मसौदे में धन के प्रवाह के स्पष्ट जिक्र करने और न्यूनतम कार्बन उत्सर्जन के साथ स्थायी जीवनशैली के समावेश पर जोर दिया था।

घोषणा में कहा गया, हम, विकसित देश पक्ष, 100 अरब डॉलर जुटाने के हमारे लक्ष्य की फिर से पुष्टि करते हैं।

इसमें क्षमता एवं तकनीक सुधार के साथ जलवायु परियोजनाओं के लिए धन की मात्रा, प्रवाह एवं पहुंच बढ़ाने की भी अपील की है।