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मुस्लिम बोर्ड ने समान नागरिक संहिता पर प्रश्नावली खारिज की

India TV News Desk 13 Oct 2016, 18:58:05
India TV News Desk

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने ट्रिपल तलाक के मुद्दे पर गुरुवार मोदी सरकार पर आरोप लगाया कि 'वह यूनिफार्म सिविल कोड लाकर देश को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं. ट्रिपल तलाक पर सरकार का विरोध गलत है.'

बोर्ड के महासचिव मौलाना मोहम्मद वली रहमानी ने एक प्रेस कॉंफ़्रेस में कहा कि भारत जैसे विविधता में एकता वाले देश के लिए यूनिफार्म सिविल कोड बिल्कुल  ठीक नहीं है। यहां अलग-अलग धर्म के लोग रहते हैं, सभी लोग एक संविधान के मुताबिक रह रहे हैं लेकिन सरकार इसको तोड़ने की कोशिश कर रही है।

मौलाना रहमानी ने अमेरिका में अलग अलग स्टेट का अपना पर्सनल लॉ है, अलग-अलग आइडेंटिटी है। हमारी सरकार वैसे तो अमेरिका की पिछलग्गू है लेकिन इस मुद्दे पर उसको फॉलो नहीं करना चाहती। उन्होंने ये भी कहा कि पंडित जवाहर लाल नेहरू बड़े दिल के आदमी थे इसलिए उन्होंने अलग-अलग ट्राइब्स के लिए संविधान में अलग-अलग प्रावधान रखवाया है।

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना मोहम्मद वली रहमानी ने आरोप लगाया कि मोदी सरहद नहीं संभाल पा रहे हैं इसलिए देश के भीतर ही लड़ाई की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ढाई साल की नाकामियां छुपाने की कोशिश कर रही है। 

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का यह कदम केंद्र सरकार द्वारा सर्वोच्च न्यायालय को यह बताने के कुछ दिनों बाद आया है कि तीन तलाक, निकाह हलाल और बहुविवाह जैसी प्रथाएं इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा या आवश्यक धार्मिक प्रथा नहीं हैं।

इसके बाद, विधि आयोग ने सात अक्टूबर को अपनी वेबसाइट पर प्रश्नावली जारी कर दी, जिसमें नागरिक संहिता मुद्दे पर लोगों की राय के लिए 16 सवाल पूछे गए हैं।

संवाददाता सम्मेलन में अन्य मुस्लिम संगठनों के प्रतिनिधियों मौलाना अरशद मदनी (जमीयत उलेमा-ए-हिंद), मोहम्मद जफर (जमात-ए-इस्लामी हिंद), मौलाना असगर इमाम मेहदी (मरकाजी जमीयत अहले हदीथ), मौलाना महमूद मदनी (जमीयत उलेमा हिंद), एम.मंजूर आलम (ऑल इंडिया मिली काउंसिल), नावेद हामिद (ऑल इंडिया मजलिए-ए-मुशवरत) तथा मौलाना अब्दुल कासिम नौमानी (कुलाधिसचिव, दारूल उलूम देवबंद) ने हिस्सा लिया।

एआईएमपीएलवी के सदस्य कमाल फारूकी ने कहा कि इसके अलावा, इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल के बरेलवी धर्म गुरुमौलाना तौकीर रजा खान तथा शिया धर्मगुरु मोहसिन ताकवी भी संवाददाता सम्मेलन में आने वाले थे, लेकिन वे नहीं आ सके। 

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने कहा, "मुस्लिम पर्सनल लॉ कुरान और हदीस पर आधारित है और हम इसे बदल नहीं सकते।"

उन्होंने कहा, "मोदी जी (प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी) लोकतंत्र के नाम पर तानाशाही थोपना चाहते हैं।"

आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के सदस्य मौलाना कल्बे जावेद ने कहा कि ये बात ग़लत है कि तीन तलाक़ का ज़िक्र कुरआन में नहीं है और ये बाद में आया। उन्होंने कहा कि क़ुरआन में कहा गया है कि पति-पत्नी में तलाक की स्थिति में दोनों तरफ दो लोग होने चाहिए जिन्हें सुलह की कोशिश करनी चाहिये। क़ुरआन में कहीं लिखा है कि एक झटके में तीन बार तलाक कहकर तलाक ले लो। 

मौलाना कल्बे जावेद ने कहा कि हज के कई नियम बदल गए हैं और इसे भी बदलना चाहिए लेकिन पर्सनल लॉ होना चाहिये।