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गुरमीत के उत्तराधिकारी को लेकर अटकलों का बाजार गर्म, डेरा ने ऐसी किसी भी पहल से किया इनकार

Reported by: Bhasha 29 Aug 2017, 17:15:00 IST
Bhasha

चंडीगढ़: अदालत से मुजरिम करार दिये गए डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह का उत्तराधिकारी कौन होगा? आज इस बात पर अटकलों का बाजार गर्म रहा तथा उनके बेटे जसमीत, गोद ली हुई बेटी हनीप्रीत और डेरा की अध्यक्ष विपासना इन्सां के नामों की चर्चा चलती रही।

हालांकि डेरा सूत्रों ने कहा कि डेरा प्रबंधन की ओर से अबतक ऐसी कोई पहल नहीं की गई है। फिलहाल डेरा की प्राथमिकता विशेष सीबीआई अदालत द्वारा कल सुनाई गई सजा के विरुद्ध उच्च न्यायालय में अपील करना है। 50 वर्षीय गुरमीत राम रहीम सिंह को दो साध्वियों के साथ रेप करने के जुर्म में 20 साल की सजा सुनाई गई है।

जसमीत की उम्र 30 साल के आसपास है। उसकी शादी पंजाब के पूर्व कांग्रेस विधायक हरमिंदर सिंह जस्सी की बेटी से हुई है। यदि जसमीत को राम रहीम का उत्तराधिकारी नियुक्त किया जाता है तो यह डेरा की उस परंपरा से हटना होगा जिसमें किसी भी उस व्यक्ति को डेरा प्रमुख नहीं बनाया जाता है जो इस संप्रदाय के वर्तमान प्रमुख के परिवार से संबंधित हो।

हनीप्रीत को भी डेरा के संभावित उत्तराधिकारी के रुप में देखा जा रहा है। वह अपने आप को पापा की एंजेल, परोपकारी, निर्देशक, संपादक और अभिनेत्री के तौर पर पेश करती हैं। विपासना इन्सां डेरा सच्चा सौदा की अध्यक्ष हैं और डेरा प्रबंधन में शीर्ष पद पर हैं। डेरा प्रबंधन कृषि, समाज कल्याण, फैक्ट्रियों, शैक्षणिक संस्थानों जैसे कई गतिविधियां संभालता है।

जब डेरा प्रमुख को दोषी ठहराये जाने पर पंचकूला और सिरसा में हिंसा फैली थी तब विपासना ने ही वीडियो संदेश के मार्फत लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की थी। जब विपासना से पूछा गया तब उन्होंने कहा कि नए डेरा प्रमुख नियुक्त करने की कोई पहल नहीं है। उन्होंने कहा , उत्तराधिकार की कोई पहल नहीं हो रही। अनुयायियों को गुरुजी पर पूरा विश्वास है। उन्होंने कहा कि फिलहाल डेरा के सभी शिक्षण संस्थान और फैक्ट्रियां बंद कर दी गयी हैं।

गौरतलब है कि गुरमीत को 23 सितंबर, 1990 को 23 साल की उम्र में डेरा सच्चा सौदा का तीसरा प्रमुख नियुक्त किया गया था। इस संप्रदाय की स्थापना 29 अप्रैल, 1948 को सिरसा में मस्ताना महाराज ने मानवता के उत्थान एवं सुंदर विश्व के वास्ते लोगों के बीच आध्यात्मिक जागरुकता फैलाने के लिए की थी। मस्ताना महाराज मूलत: बलूचिस्तान के थे।

सन् 1960 में मस्ताना महाराज ने डेरा की जिम्मेदारी अपने उत्तराधिकारी शाह सतनाम सिंह को सौंपी थी। डेरा अपना लाखों अनुयायी होने का दावा करता है। वह शिक्षण संस्थान, अस्पताल, कृषि, विनिर्माण गतिविधियां चलाता है। उसके प्रशासन, राजनीति, युवा फेडरेशन, समाज कल्याण, मेडिकल, शैक्षणिक और आईटी जैसी कई शाखाएं हैं।