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कुंभ मेले का यूनेस्को में सूचीबद्ध होना गर्व की बात: PM मोदी

विदेश मंत्रालय ने बताया कि कुंभ मेले को ‘मानवता के अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर की प्रतिनिधि सूची’’ में शामिल करने का निर्णय दक्षिण कोरिया के जेजू में हुए 12वें सत्र में लिया गया। मंत्रालय ने कहा कि यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण संबंधी अं

Edited by: India TV News Desk 08 Dec 2017, 13:38:27 IST
India TV News Desk

नई दिल्ली: हिंदू तीर्थयात्रियों के श्रद्धा के प्रतीक कुंभ मेले के यूनेस्को की मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल होने के एक दिन बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को इसे देश के लिए गर्व और खुशी की बात बताया। मोदी ने ट्वीट कर कहा, "भारत के लिए बेहद खुशी और गर्व की बात।" विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को कहा था कि यूनेस्को के अंतर्गत अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा के लिए अंतरसरकारी समिति ने दक्षिण कोरिया के जेजू में 12वें सत्र के कुंभ मेले का उद्घाटन किया। भारत की ओर से दो सालों में योग और नवरोज (पारसी नववर्ष) के बाद कुंभ मेला यूनेस्को को सूचीबद्ध किया गया है।

विदेश मंत्रालय ने बताया कि कुंभ मेले को ‘मानवता के अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर की प्रतिनिधि सूची’’ में शामिल करने का निर्णय दक्षिण कोरिया के जेजू में हुए 12वें सत्र में लिया गया। मंत्रालय ने कहा कि यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण संबंधी अंतर सरकारी समिति की बैठक 4 से 9 दिसंबर के बीच हो रही है। योग और नवरोज के बाद पिछले करीब दो वर्षो में इस प्रकार की मान्यता प्राप्त करने वाला कुंभ मेला तीसरा धरोहर है।

कुंभ मेला को अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर के रूप में मान्यता प्रदान करने की सिफारिश करते हुए विशेषज्ञ समिति ने कहा था कि यह पृथ्वी पर तीर्थयात्रियों का सबसे बड़ा शांतिपूर्ण जमावड़ा है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि समिति के अनुसार यह महोत्सव व्यापक एवं शांतिपूर्ण है और इसका आयोजन भारत के इलाहाबाद, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में किया जाता है। इस दौरान भारत में पवित्र नदी के किनारे पूजा अर्चना की जाती है। यह धार्मिक महोत्सव सहिष्णुता और समावेशी प्रकृति को प्रदर्शित करता है और इसमें बिना किसी भेदभाव के लोग हिस्सा लेते हैं।

इससे पहले, संस्कृति मंत्री महेश शर्मा ने ट्वीट किया, ‘‘हमारे लिए बेहद गौरव का क्षण है कि यूनेस्को ने कुंभ मेला को सांस्कृतिक धरोहर के तौर पर जगह दी है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘कुंभ मेला को धरती पर श्रद्धालुओं का सबसे बड़ा शांतिपूर्ण जमघट समझा जाता है जिसमें जाति, पंथ या लिंग से इतर लाखों लोग हिस्सा लेते हैं।’’