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आदर्श घोटाला: रक्षा मंत्रालय की जांच में सेना के 2 पूर्व जनरल के नाम सामने आए

Reported by: Bhasha 09 Jul 2017, 18:45:15 IST
Bhasha

नई दिल्ली: मुंबई के आदर्श हाउसिंग सोसायटी घोटाला मामले में रक्षा मंत्रालय की तरफ से नियुक्त उच्चस्तरीय समिति ने अपनी जांच में सेना के 2 पूर्व प्रमुखों, जनरल एन. सी. विज और जनरल दीपक कपूर तथा कई अन्य रिटायर्ड आर्मी ऑफिसर्स की संलिप्तता पाई है। जांच समिति ने अपने सौ पन्ने की रिपोर्ट में तीन रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल जी. एस. सिहोता, तेजिंदर सिंह और शांतनु चौधरी तथा 4 मेजर जनरल ए. आर. कुमार, वी. एस. यादव, टी. के. कौल और आर. के. हुड्डा के नामों का भी जिक्र किया है। रिपोर्ट में कई अनियमितताओं का जिक्र है। मुंबई में बनाए गए अपार्टमेंट कारगिल के नायकों के परिजनों के लिए थे। लेकिन नियमों का उल्लंघन कर सैन्य अधिकारियों, नेताओं और नौकरशाहों को कथित तौर पर फ्लैटों के आवंटन किए गए।

वर्ष 2010 में सामने आने के बाद आदर्श घोटाला भ्रष्टाचार का प्रतीक बन गया और इससे एक बड़ा राजनीतिक तूफान उठ खड़ा हुआ था। इस घोटाले के कारण महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण को इस्तीफा देना पड़ा था। जांच के मुताबिक प्रतीत होता है कि जनरल विज ने जांच के दायरे में आए जमीन के लिए किसी भी चरण में कोई सवाल नहीं उठाए न ही उन्होंने वार्षिक सुरक्षा समीक्षा के दौरान कोई सुरक्षा चिंता जाहिर की। सूत्रों ने बताया कि रिपोर्ट के मुताबिक यह पता चला कि उनका इस मामले में निहित स्वार्थ था। रिपोर्ट में कहा गया है कि जनरल कपूर भले ही मामले में सीधे जुड़े हुए नहीं थे लेकिन सोसायटी की सदस्यता हासिल करने में उन्हें ठीक से सलाह नहीं दी गई। इसमें कहा गया है कि परिसर में फ्लैट लेने के परिणाम पर उन्होंने गहनता से विचार नहीं किए।

भारतीय नौसेना ने सुरक्षा चिंताएं जताई थीं क्योंकि भवन से इसके कई महत्वपूर्ण प्रतिष्ठान सीधे नजर आते थे। भवन परिसर का निर्माण रक्षा मंत्रालय की जमीन किया गया था और इसमें कारगिल युद्ध के नायकों और युद्ध में अपने परिजनों को गंवाने वालों को लाभ मिलना था। रक्षा मंत्रालय की जांच में सेना के कई वरिष्ठ अधिकारियों को दोषी पाया गया और इसमें कहा गया है कि जिन लोगों को घोटाले में संलिप्त पाया गया या अनियमितताओं की तरफ से जिन लोगों ने आंखें मूंद रखी थीं उन्हें किसी भी रोजगार या सरकार की सेवा में नहीं लगाया जाना चाहिए। बंबई हाई कोर्ट ने पिछले वर्ष अपने आदेश में हाउसिंग सोसायटी के सदस्यों को जिम्मेदार ठहराया और इसने कहा कि ये लोग उच्च पदस्थ नौकरशाहों या नेताओं या मंत्रियों के निकट रिश्तेदार हैं और षड्यंत्र कर जमीन हासिल किया गया।

रिपोर्ट में पूर्व नौसेना प्रमुख ऐडमिरल माधवेन्द्र सिंह का भी नाम है जिन्हें हाउसिंग सोसायटी में एक फ्लैट आवंटित किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भले ही वह घोटाले में संलिप्त नहीं थे लेकिन हाउसिंग सोसायटी का सदस्य बनने के लिए वह अयोग्य थे क्योंकि उन्होंने गलत हलफनामा दिया कि मुंबई में उनका कोई घर नहीं है। जांच रिपोर्ट के मुताबिक घोटाले में दोषी पाए गए लगभग सभी सैन्य अधिकारियों को परिसर में फ्लैट दिए गए थे। तत्कालीन रक्षा मंत्री ए. के. एंटनी ने 9 दिसंबर 2010 को CBI जांच के आदेश दिए थे ताकि घोटाले में रक्षा बल और रक्षा संपात्ति अधिकारियों की जवाबदेही तय की जा सके।